एक वक्त था जब फिल्म खत्म होने से चंद मिनट पहले ही दर्शक थिएटर छोड़ना शुरू कर देते थे. अब एंड क्रेडिट्स का इंतजार होता है. पूरी पब्लिक इत्मिनान के साथ सारे क्रेडिट रोल होते हुए देखती है. कभी तो एंड क्रेडिट्स के बाद भी थिएटर में ही रहते हैं.

एक वक्त होता था जब फिल्म खत्म होने से चंद मिनट पहले ही दर्शक धीरे धीरे कर थिएटर छोड़ना शुरू कर देते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होता. बल्कि पिक्चर खत्म होते-होते एंड क्रेडिट्स का इंतजार होता है. पूरी पब्लिक इत्मिनान के साथ सारे क्रेडिट रोल होते हुए देखती है और कभी कभी तो एंड क्रेडिट्स के बाद भी थिएटर में जमे ही रहते हैं. ये सब हुआ है ऐंड क्रेडिट्स सीन्स की वजह से. जो इतने दिलचस्प होते हैं कि कई बार पूरी फिल्म पर भारी पड़ जाते हैं. मतलब पिक्चर की ढाई घंटे की कहानी एक तरफ और आखिर में आने वाला एक या दो मिनट का पोस्ट क्रेडिट सीन एक तरफ. हाल ही में आई कुछ फिल्मों के पोस्ट क्रेडिट सीन्स के बाद अब फिल्म के आखिरी के कुछ मिनटों के लिए दर्शकों की क्यूरियोसिटी अलग ही लेवल पर होती है.

स्ट क्रेडिट सीन किसी भी मूवी के लास्ट में प्ले होते हैं. फिल्म खत्म होने के बाद क्रेडिट रोल होता है. जिसमें फिल्म की पूरी स्टार कास्ट और क्रू के नाम होते हैं. साथ में कोई सीन प्ले होता है. ये सीन अक्सर फिल्म के सिक्वेल या साइड स्पिन का कर्टन रेजर या टीजर की तरह होता है. या, आने वाली किसी कनेक्टेड फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाता है. हालांकि हर फिल्म का पोस्ट क्रेडिट सीन बहुत इंटरेस्टिंग नहीं होता. फिल्म के फनी मोमेंट्स को एक साथ पिरोकर भी पोस्ट क्रेडिट सीन में पिरो दिया जाता है. हॉलीवुड फिल्मों में पोस्ट क्रेडिट सीन काफी समय से आते रहे हैं. बॉलीवुड की फिल्मों में भी ऐसे एक्सपेरिमेंट्स होने लगे हैं. जिसमें साउथ की फिल्में भी पीछे नहीं हैं. मारवल की सुपरहीरो मूवीज में अकसर पोस्ट क्रेडिट सीन्स में अगली फिल्म की अहम जानकारी दी जाती है.

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