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दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच बीते साल मई में रिश्ते तल्ख हो गए थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच बीते साल मई में रिश्ते तल्ख हो गए थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

India-China Talks: पैन्गोंग त्सो (Pangong Tso) के दोनों किनारों पर डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया के बाद दोनों पक्षों के बीच 10वें दौर की बातचीत 20 फरवरी को हुई थी. उस दौरान दोनों सेनाओं ने अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों, तोपों, और वाहनों को डिसइंगेजमेंट समझौते के तहत पीछे हटा लिया था.

India-China Border Tension: भारत (India) और चीन (China) के बीच सीमा पर तनाव खत्म करने और डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया (Disengagement Process) पर चर्चा के लिए शुक्रवार को 11वें दौर की बैठक होने जा रही है. कहा जा रहा है कि इस बैठक में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानि चीन की सेना के साथ हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देपसांग के मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है. यह जानकारी अधिकारियों ने दी है. बताया जा रहा है कि कमांडर स्तर की यह बैठक भारतीय पक्ष के चुशुल-मोल्दो में सुबह 10.30 बजे शुरू होगी. साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को कहा ‘हम बाकी बचे इलाकों में डिसइंगेजमेंट देखना चाहेंगे, जिससे पूर्वी लद्दाख में डी एस्केलेशन बढ़ेगा.’ उन्होंने बताया कि उम्मीद है कि इससे शांति बहाल हो सकेगी. उन्होंने जानकारी दी ‘वर्किंग मैकेनिज्म ऑन कॉर्डिनेशन एंड कंसल्टेशन (WMCC) की 12 मार्च की बैठक के दौरान दोनों पक्ष 11वें दौर की बैठक के लिए तैयार हो गए थे.’ पैन्गोंग त्सो के दोनों किनारों पर डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया के बाद दोनों पक्षों के बीच 10वें दौर की बातचीत 20 फरवरी को हुई थी. उस दौरान दोनों सेनाओं ने अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों, तोपों, और वाहनों को डिसइंगेजमेंट समझौते के तहत पीछे हटा लिया था. भारत और चीन के बीच यह बैठक करीब 16 घंटों तक चली थी. उस दौरान दोनों सेनाएं वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव वाले मुद्दों को ‘स्थिर और व्यवस्थित’ तरीके से सुलझाने के लिए तैयार हुई थीं. यह भी पढ़ें: भारत ने पूर्वी लद्दाख के शेष क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे हटाने की वकालत कीखास बात है कि दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच बीते साल मई में रिश्ते तल्ख हो गए थे. उस दौरान चीन की सेना ने भारतीय जवानों को पेट्रोलिंग करने से रोका था. वहीं, जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे. इस झड़प में 4 चीनी सैनिकों के मारे जाने की भी खबर थी. सीमा पर हुए इस तनाव के बाद दोनों देशों के बीच विवाद काफी बढ़ गया था.

हिंदुस्तान टाइम्स को एक रिटायर्ड कमांडर ने बताया कि पैन्गोंग झील सेक्टर में डिसइंगेजमेंट शुरू हुआ और 10 से भी कम दिनों में खत्म हो गया. ऐसा लग रहा है कि एलएसी और दूसरे बिंदुओं पर प्रगति में कमी के कारण मामले ने शुरुआती गति खो दी है. उन्होंने कहा ‘मैं इस वार्ता से बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं करता हूं क्योंकि हम चीनियों पर पर्याप्त दबाव नहीं बना रहे हैं.’ हालांकि, डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया की शुरुआत में ही केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दावा किया था कि भारत को इस समझौते में कोई नुकसान नहीं हुआ है.







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