आम आदमी की बढ़ी मुश्किलें- सब्जियों के बाद अब महंगी हुई दालें, जानिए क्यों

दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में दालों की कीमत 15 से 20 रुपये तक बढ़ चुकी है.

Pulses Price in India-दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में दालों की कीमत 15 से 20 रुपये तक बढ़ चुकी है. पिछले साल इस अवधि में चना दाल की कीमत 70-80 रुपये प्रति किलो थी लेकिन इस बार यह 100 रुपये के पार पहुंच चुकी है. अरहर दाल 115 रुपये प्रति किलो में बिक रही है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 29, 2020, 10:12 AM IST

नई दिल्ली. कोरोना के इस संकट में आम आदमी की मुश्किलें रोजना बढ़ती जा रही है. एक ओर बीते दो महीने से सब्जियों (Food Inflation) की कीमतों में तेजी का दौर जारी है. वहीं, अब दालों की कीमतें (Pulses Price in India) भी बढ़ने लगी है. दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में दालों की कीमत 15 से 20 रुपये तक बढ़ चुकी है. पिछले साल इस अवधि में चना दाल की कीमत 70-80 रुपये प्रति किलो थी लेकिन इस बार यह 100 रुपये के पार पहुंच चुकी है. अरहर दाल 115 रुपये प्रति किलो में बिक रही है. कारोबारियों की मांगी है कि सरकारी एजेंसी नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (नेफेड) को सप्लाई बढ़ाने के लिए अपना स्टॉक रिलीज करना चाहिए. सप्लाई में गिरावट आई है. जबकि, डिमांड लगातार बढ़ रही है. इसलिए कारोबारियों ने 2020-21 के लिए आयात कोटा जारी करने की मांग की है. हालांकि, सरकार का मानना है कि आपूर्ति की स्थिति ठीकठाक है और अगले तीन महीने में खरीफ सीजन की फसल बाजार में आनी शुरू हो जाएगी. इस साल बंपर पैदावार का अनुमान है.

आपको बता दें कि हाल में कृषि आयुक्त एसके मल्होत्रा ने इंडियन पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) द्वारा आयोजित एक वेबिनार में बताया था कि भारत को उम्मीद है कि खरीफ सीजन में दालों का कुल उत्पादन 93 लाख टन होगा. अरहर का उत्पादन पिछले साल के 38.3 लाख टन के मुकाबले इस साल बढ़कर 40 लाख टन होने की उम्मीद है.

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क्यों महंगी हो रही हैं दालें- कारोबारियों का कहना हैं कि लॉकडाउन के दौरान तुअर की कीमतें 90 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गईं, जो बाद में 82 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गईं. हालांकि, अब कीमत फिर से चढ़ने लगी है. त्योहारी सीजन की मांग के कारण दालों की मांग में तेजी आई है.

व्यापारियों को डर है कि कर्नाटक में अरहर की फसल को ज्यादा बारिश से नुकसान होगा. पैदावार में 10% का नुकसान हो सकता है. उम्मीद है कि जब तक नई फसल नहीं आएगी, तब तक कीमतें मजबूत बनी रहेंगी.

दलहन आयातकों ने 2010-21 के लिए तुअर के लिए आयात कोटा जारी करने की मांग की है. सरकार ने अप्रैल में 4 लाख टन तुअर के आयात कोटा की घोषणा की थी, जिसे अभी तक आवंटित नहीं किया गया है. इसमें से 2 लाख टन तुअर को मोजाम्बिक से आना था.

आयात कोटा अब जारी किया जाना चाहिए था ताकि आयात हो सके. दुनिया के बाजारों में तुअर की कम उपलब्धता है, क्योंकि भारत के घरेलू तुअर में वृद्धि के बाद अंतर्राष्ट्रीय किसानों ने अरहर से दूसरी फसलों की ओर रुख कर लिया है.

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