चुनावी रंजिश को लेकर हुए बहुचर्चित हत्याकांड में प्रधान के जेठ को मिली सशर्त जमानत

जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष राय की अदालत से सामने आई संदिग्ध अभियोजन कहानी व पुलिस की लचर तफ्तीश का आरोपी को मिला लाभ

प्रधानी के चुनाव की रंजिश को लेकर हुई मनियारपुर में हुई थी हत्या

रिपोर्ट-अंकुश यादव

सुलतानपुर। चुनावी रंजिश को लेकर हुए बहुचर्चित मनियारपुर हत्याकांड में बगैर गोली चले ही फायरिंग कर हमले के आरोप से जुड़े मामले में तमंचा व कारतूस के सम्बंध में साक्ष्य न पेश कर पाने वाले अभियोजन पक्ष को जिला जज की अदालत से बड़ा झटका लगा है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष राय ने उभय पक्षों की बहस सुनने के पश्चात अभियोजन की कहानी में सामने आई खामियों का लाभ देते हुए आरोपी प्रधान के जेठ की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
मामला कुड़वार थाना क्षेत्र के मनियारपुर गांव से जुड़ा है, जहां के रहने वाले आबाद अली ने बीते 28 दिसंबर की शाम को हुई घटना का जिक्र करते हुए मुकदमा दर्ज कराया आरोप के मुताबिक घटना की शाम को वह अपने भाई की दुकान पर बैठा था,तभी गांव के ही मीशम हुसैन, निजाम उर्फ निज्जू अपने हाथ में कट्टा लेकर,सहआरोपी जानेआलम, शानेआलम,बज्जन, मतलूब,राजा हाथों में लाठी-डंडा लेकर ललकारते हुए आये और प्रधानी के चुनाव की रंजिश को लेकर हमला बोल दिये। इस घटना में अभियोगी के जरिए जान से मारने की नीयत से कट्टे से फायर करने की बात एफआईआर में कही गई है। इस मामले में अभियोगी पक्ष के सफदर अली,इमाम अली आदि को गम्भीर चोटे आई थी ,जिसके चलते इलाज के दौरान सफदर की जान भी चली गई। मामले में पहले अभियोगी की तहरीर पर भादवि की धारा-452,323,504,506,34,427 में मुकदमा दर्ज हुआ,चोटहिल की मृत्यु के बाद विवेचक अरबिंद पांडेय के जरिए भादवि की धारा-307,302 की बढ़ोतरी की गई। इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसी मामले में मौजूदा प्रधान के आरोपी जेठ मीशम हुसैन की तरफ से जमानत अर्जी जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रस्तुत की गई। जिस पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता एवं अभियोगी के निजी अधिवक्ता ने मीशम हुसैन की हत्याकांड में अहम भूमिका बताते हुए उसकी जमानत अर्जी पर जमकर विरोध जाहिर किया और अदालत से जमानत अर्जी खारिज करने की मांग की। वहीं बचाव पक्ष से पैरवी कर रहे बार अध्यक्ष अधिवक्ता नागेंद्र कुमार सिंह,वरिष्ठ अधिवक्ता केसरी प्रसाद त्रिपाठी व उनके सहयोगी अधिवक्ता मोहम्मद हफीज ने अपने साक्ष्यों एवं तर्कों को प्रस्तुत करते हुए कहा कि अभियोगी ने एफआईआर में कट्टे से फायर कर हमले की बात कही है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार फायरआर्म इंजरी मृतक के शरीर पर आई ही नहीं है, इसके अलावा विवेचक के जरिए भी तमंचा-कारतूस की बरामदगी नहीं की जा सकी है और न ही कोई ऐसा साक्ष्य जुटाया जा सका है, जिससे कि फायरिंग की बात पर विश्वास किया जा सके। ऐसे में अभियोजन की कहानी पर ही सवाल खड़ा करते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने मीशम हुसैन के खिलाफ लगे आरोपो को निराधार बताते हुए उसकी जमानत अर्जी स्वीकार करने की मांग की। उभय पक्षो को सुनने के पश्चात जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष राय ने सामने आई अभियोजन कहानी एवं मौजूद साक्ष्यों के आधार पर तथ्यो एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए बचाव पक्ष के तर्कों से सहमत होकर उसकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली और उसे सशर्त रिहा करने का आदेश दिया है।

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