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प्रयागराज में भारत बंद को समर्थन नहीं

प्रयागराज में भारत बंद को समर्थन नहीं

Bharat Bandh: किसानों का कहना है कि उन्होंने कड़ी मेहनत कर अपने खेतों में हरी सब्जियां पैदा की हैं, ऐसे में एक दिन का भी बंद होने से उनकी सब्जियां सड़ जायेंगी और उनको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. इसलिये वे भारत बंद का कतई समर्थन नहीं करेंगे और अपनी उपज लेकर मंडी जरुर आयेंगे.

प्रयागराज. केंद्र सरकार द्वारा लाये गए कृषि सुधार कानून (AMPC Act) के विरोध में जहां किसान संगठनों ने आठ दिसम्बर को भारत बंद (Bharat Bandh) का आह्वान किया है और कांग्रेस, सपा ,आम आदमी पार्टी समेत दूसरे राजनीतिक दलों ने उसे समर्थन भी दिया है. वहीं सगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) में किसानों और आढ़तियों ने भारत बंद का समर्थन न करने का फैसला लिया है. किसानों का कहना है कि उन्होंने कड़ी मेहनत कर अपने खेतों में हरी सब्जियां पैदा की हैं, ऐसे में एक दिन का भी बंद होने से उनकी सब्जियां सड़ जायेंगी और उनको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. इसलिये वे भारत बंद का कतई समर्थन नहीं करेंगे और अपनी उपज लेकर मंडी जरुर आयेंगे.

बोले भारत बंद का कोई मतलब नहीं

वहीं प्रयागराज की सबसे बड़ी कृषि एवं उत्पादन मंडी मुंडेरा के आढ़तियों ने भी भारत बंद का समर्थन न करने का ऐलान किया है. उनका कहना है कि वे किसानों की फसल खरीदकर किसानों की एक तरह से सेवा का ही कार्य कर रहे हैं. इसलिए भारत बंद के समर्थन का कोई मतलब नहीं है. आढ़तियों ने कहा है कि वे मंगलवार को भी अपनी आढ़त खोलेंगे और जो किसान अपनी उपज लेकर आयेंगे उनसे खरीददारी भी करेंगे. आढ़तियों का कहना है कि किसानों ने खेतों में इन दिनों हरी सब्जियां उगायी हैं, लेकिन एक दिन की बंदी होने पर ही उन्हें हजारों का नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए भारत बंद से किसानों को किसी तरह का नुकसान न हो आढ़त एशोसिएसन ने मंडी न बंद करने का फैसला लिया है.

सिंधु बॉर्डर पर चल रहा है किसान आंदोलनगौरतलब है कि कृषि सुधार कानूनों में संशोधन और एमएसपी को लेकर ठोस आश्वासन की मांग को लेकर आन्दोलित किसान संगठन सिंधु बॉर्डर पर पिछले कई दिनों से डेरा डाले हुए हैं. अब तक केन्द्र सरकार और किसान संगठनों के बीच हुई कई दौर की वार्ता विफल रही है. प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांग है कि इस केन्द्र सरकार नए कृषि कानून को वापस ले.



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