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वॉशिंगटन. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल की नीतियों में हुए भारी बदलाव के बाद राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन पूरे जोर-शोर से इस तैयारी में जुटा है कि अमेरिका को किससे, कैसे और क्या बात करनी चाहिए तथा इसके लिए क्या तैयारियां होनी चाहिए.

राष्ट्रपति बाइडन ने पद भार ग्रहण करने के बाद दूसरे देश के एक नेता को 12 बार फोन किया है. अन्य विदेशी नेताओं के साथ भी वह इसी उत्साह और जोश के साथ बार-बार संपर्क साध रहे हैं. ऐसा करना व्हाइट हाउस की परंपरा रही है, लेकिन ट्रंप की नजर में यह बेकार की कवायद थी.

फोन पर दुनिया भर के नेताओं से बातचीत करने की बाइडन की नीति, उनका काम करने का अपना तरीका है और फायदेमंद भी है क्योंकि इसमें उन नेताओं से भी संपर्क किया जा रहा है जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी बराबरी का नहीं मानते हुए दूर कर दिया था, लेकिन अपने प्रयासों से बाइडन दुनिया भर में सभी देशों के साथ अमेरिका के संबंधों की मरम्मत करने में जुटे हुए हैं.

जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बराक ओबामा प्रशासन में व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में काम कर चुके मैथ्यू गुडमैन का कहना है, ‘इन्हें पक्का पता है कि शुरुआत से ही इन्हें सहयोगियों/साझेदारों के साथ बेहतर संबंध बनाकर चलना होगा.’

उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय संगठनात्मक नीति है जिसके तहत उन्होंने ट्रंप प्रशासन के अध्याय का पन्ना पलटने और गठबंधनों को वापस पटरी पर लाने का फैसला किया है. बातचीत के लिए तैयारी इसी का एक हिस्सा है.



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