कोरोना-रोधी वैक्सीन कोविशील्ड की पहली डोज लगवाने के बाद जब एंटीबॉडी नहीं बनी तो की पुलिस में शिकायत. (फाइल फोटो)

कोरोना-रोधी वैक्सीन कोविशील्ड की पहली डोज लगवाने के बाद जब एंटीबॉडी नहीं बनी तो की पुलिस में शिकायत. (फाइल फोटो)

प्रताप चंद्र ने कहा कि जब उन्होंने सरकारी मान्यता प्राप्त लैब में कोविड एंटी बॉडी टेस्ट कराई, तो 2 दिन बाद आई रिपोर्ट में पता चला कि शरीर में एंटी बॉडी न बनने के साथ ही प्लेटलेट्स में भी 50% की कमी आ गई है.

लखनऊ. लखनऊ में एक रोचक और अनोखा मामला सामने आया है. यहां एक शख्स ने कोरोना रोधी वैक्सीन कोविशील्ड की पहली डोज ली थी. लेकिन उसके शरीर में एंटीबॉडी नहीं बनी, बल्कि उसके प्लेट्सलेट भी घट गए. तब उसने थाने में जाकर तहरीर दी है. यह मामला लखनऊ के आशियाना थाना क्षेत्र का है. कोविशील्ड लगवाने के बाद भी एंटीबॉडी न बनने पर शिकायत करते हुए टूर एंड ट्रैवल्स कारोबारी प्रताप चंद्र ने आशियाना थाने में तहरीर दी है. कारोबारी ने कोविशील्ड लगवाने के बाद एंटीबॉडीज न बनने और प्लेटलेट्स घटने का आरोप लगाया है. उसने सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला, आईसीएमआर के डायरेक्टर, डब्ल्यूएचओ के डीजी, स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के खिलाफ तहरीर दी है.

सीएमओ की रिपोर्ट पर होगी आगे की कार्रवाई

टूर ट्रैवल्स कारोबारी प्रताप चंद्र का कहना है कि उन्होंने कोविशील्ड की एक डोज लगवाई थी, लेकिन एंटीबॉडी नहीं बनी. इसलिए सीरम के सीईओ अदार पूनावाला, ICMR के डायरेक्टर बलराम भार्गव, WHO के DG डॉक्टर टेडरोस, स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी ने कहा कि तहरीर को जांच के लिए सीएमओ के पास भेजा गया है. सीएमओ की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी.

25 मई को कराई थी जांचप्रतापचन्द्र ने अपनी तहरीर में आईसीएमआर के डायरेक्टर के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि कोविशील्ड वैक्सीन की पहली डोज के बाद शरीर में अच्छे लेवल की एंटीबॉडी बन जाती है. लेकिन पहली डोज लगने के डेढ़ महीने बाद 25 मई को जब उन्होंने सरकारी मान्यता प्राप्त लैब में कोविड एंटी बॉडी टेस्ट कराई, तो 2 दिन बाद आई रिपोर्ट में पता चला कि शरीर में एंटी बॉडी न बनने के साथ ही प्लेटलेट्स में भी 50% की कमी आ गई है.

‘FIR दर्ज न हुई तो जाएंगे कोर्ट’

प्रताप चंद्र का कहना है कि पूरा मामला पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है. बावजूद दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो वह इस मामले को कोर्ट तक ले जाएंगे.









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