6 नए AEW&C ब्लॉक 2 एयरक्राफ्ट नेत्र सर्विलांस विमानों के मुकाबले ताकतवर होंगे और दुश्मन के इलाके में अंदर तक 360 डिग्री कवरेज प्रदान करेंगे.

6 नए AEW&C ब्लॉक 2 एयरक्राफ्ट नेत्र सर्विलांस विमानों के मुकाबले ताकतवर होंगे और दुश्मन के इलाके में अंदर तक 360 डिग्री कवरेज प्रदान करेंगे.

6 नए AEW&C Block 2 Aircraft के विकास के लिए DRDO एयर इंडिया के विमानों को अधिग्रहित करेगा. फिर इन्हें एक यूरोपियन कंपनी के पास भेजा जाएगा, जहां इनमें सुधार करके रडार स्थापित किए जाएंगे.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    December 16, 2020, 5:28 PM IST

नई दिल्ली. चीन (China) और पाकिस्तान (Pakistan) से लगी सीमा पर सर्विलांस की क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए भारत ने 6 नए एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल प्लेन का निर्माण करने का फैसला किया. इसके लिए एयर इंडिया के 6 नए एयरक्राफ्ट उपयोग में लिए जाएंगे. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) इन विमानों का विकसित करेगा और इससे स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, साथ ही 6 नए सर्विलांस एयरक्राफ्ट मिलने के बाद वायुसेना की सर्विलांस क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा. विशेषज्ञ इसे सरहद पर छह नई आंखों के समान देख रहे हैं. .

सरकारी सूत्रों के हवाले से ANI ने जानकारी दी है कि AEW&C ब्लॉक 2 एयरक्राफ्ट का विकास डीआरडीओ द्वारा 10,500 करोड़ के प्रोजेक्ट के तहत किया जाएगा. इसके लिए एयर इंडिया से 6 एयरक्राफ्ट अधिग्रहित किए जाएंगे और उन्हें रडार के साथ उड़ान भरने के लिए मोडिफाइड किया जाएगा. इन विमानों के निर्माण से सशस्त्र बलों को 360 डिग्री सर्विलांस क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी.

सूत्रों ने मुताबिक, ”6 नए AEW&C ब्लॉक 2 एयरक्राफ्ट नेत्र सर्विलांस विमानों के मुकाबले ताकतवर होंगे और दुश्मन के इलाके में अंदर तक 360 डिग्री कवरेज प्रदान करेंगे. नए विमानों के विकास के लिए एयर इंडिया से 6 विमान अधिग्रहित करने का मतलब ये है कि यूरोपियन कंपनी से 6 एयरबस 330 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने की योजना को टाल दिया गया है.”

डीआरडीओ (DRDO) ने पहले 6 नए एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (अवॉक्स) को एयरबस 330 एयरक्राफ्ट पर विकसित करने का फैसला किया था, जिसके लिए बेंगलुरु में सुविधाएं तैयार की जा रही थीं. सूत्रों ने कहा कि योजना के मुताबिक एयर इंडिया के 6 विमानों को यूरोपियन कंपनी के पास भेजा जाएगा और वहां सुधार के बाद इन विमानों पर रडार स्थापित किए जाएंगे. ANI के मुताबिक प्रोजेक्ट को इस तरह तैयार किया गया है कि डिफेंस सेक्टर में मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को प्रमोट किया जा सके.AEW&C ब्लॉक-1 प्रोजेक्ट पहले ही अपनी डेडलाइन से बहुत देरी से चल रहा है, हालांकि इस तरह के विमान विकसित करने में अपने गहन अनुभव के चलते डीआरडीओ का एयरबोर्न स्टडीज लैब इन्हें जल्द से जल्द पूरा करने में लगा हुआ है. भारतीय वायुसेना के पास 3 फॉल्कन अवॉक्स सिस्टम हैं, जिन्हें इजरायल और रूस से खरीदकर विकसित किया गया है. ब्लॉक 1 सिस्टम के लिए जहां इजरायल से रडार खरीदा गया, वहीं रूस के इल्यूशिन-76 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट पर इसे फिट किया गया.

डीआरडीओ की ओर से विकसित किए गए दो नेत्र विमानों ने हालिया तनाव के दौरान बेहतरीन काम किया और दुश्मन की सीमा में अंदर तक सर्विलांस कवरेज प्रदान किया है. 6 नए “आई इन द स्काई” विमानों को देश में अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया जाएगा ताकि पड़ोसी देशों से लगी सीमा पर सर्विलांस की प्रक्रिया प्रभावी तरीके से काम करे.

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