अरुणिमा

श्रीनगर. जम्मू में उच्च सुरक्षा वाले हवाई अड्डा परिसर स्थित वायुसेना स्टेशन पर ड्रोन हमले में इस्तेमाल आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज) को आरडीएक्स और नाइट्रेट के मिश्रण से तैयार किया गया था. ड्रोन हमले की जांच में जुटे फोरेंसिक विशेषज्ञों ने सोमवार को यह जानकारी दी. जांच अधिकारियों ने पहले ही बताया था कि ड्रोन द्वारा गिरायी गई विस्फोटक सामग्री आरडीएक्स और अन्य रसायनों के मिश्रण का उपयोग कर बनायी गई हो सकती है.

जांच में शामिल अधिकारियों ने News18 को बताया कि पहला IED जो देर रात 1:37 बजे ब्लास्ट हुआ, उसमें 1.5 किलोग्राम आरडीएक्स और एक नाइट्रेट यौगिक का मिश्रण था, जबकि दूसरे IED में अधिक संख्या में बॉल बेयरिंग थे. एक अधिकारी ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि पहला आईईडी स्टेशन के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाया गया था, जबकि दूसरे आईईडी का मकसद जवानों की जान लेना था.’

गौरतलब है कि जम्मू में हवाई अड्डा परिसर में स्थित वायुसेना स्टेशन में शनिवार (27 जून) देर रात ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए विस्फोटक गिराये गए थे, जिसमें दो जवान मामूली रूप से घायल हो गए थे. पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों का देश के किसी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान पर इस तरह का यह पहला ड्रोन हमला है.

पहला विस्फोट शनिवार देर रात एक बजकर 40 मिनट के आसपास हुआ, जबकि दूसरा उसके छह मिनट बाद हुआ. उन्होंने बताया कि इस बम विस्फोट में दो वायुसेना कर्मी घायल हो गए. उन्होंने बताया कि पहले धमाके में शहर के बाहरी सतवारी इलाके में भारतीय वायुसेना द्वारा संचालित हवाई अड्डे के उच्च सुरक्षा वाले तकनीकी क्षेत्र में एक मंजिला इमारत की छत को नुकसान हुआ, जबकि दूसरा विस्फोट छह मिनट बाद जमीन पर हुआ.

जांचकर्ताओं ने हवाई अड्डे की चारदीवारी पर लगे कैमरों सहित सीसीटीवी फुटेज खंगाला, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्रोन कहां से आए थे. हालांकि सभी सीसीटीवी कैमरे सड़क की ओर लगे थे. अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन ने विस्फोटक सामग्री गिराई और वे रात के दौरान या तो सीमा पार या किसी अन्य स्थान चले गए. जम्मू हवाई अड्डे और अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच हवाई दूरी 14 किलोमीटर है.

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