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मिर्जापुर डीएम ने की दिव्यांग की मदद,

मिर्जापुर डीएम ने की दिव्यांग की मदद,

Mirzapur News: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में रहने वाले एक दिव्यांग ने ट्वीट (Tweet) के जरिए मदद मांगी. घर पहुंचकर डीएम से उनका आर्थिक सहायता की.

मिर्जापुर. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर (Mirzapur) में मुश्किलों के दौर से गुजर रहे दिव्यांग ने ट्विटर पर ट्वीट कर जिलाधिकारी मिर्ज़ापुर से ईलाज के लिए दवा और खाने को लेकर मदद मांगी. ट्वीट का संज्ञान ले कर खुद दिव्यांग के पास उनके घर मदद लेकर खुद डीएम पहुंचे गए. दिव्यांग को दवा और खाने के लिए 6 हजार रुपये हर महीने की प्रदान की. दिव्यांग गोपाल खंडेवाल की इससे पहले फिल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने भी तारीफ कर उनकी मदद की थी. गोपाल खंडेवाल अब तक 10 हजार बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दे चुके है.

मिर्जापुर के पत्तिकापुरा कछवा मझवा गांव  में दोनों पैर से दिव्यांग गोपाल खंडेवाल गांव के बगीचे में बच्चों को 21 सालों से निशुल्क शिक्षा दे कर ज्ञान की अलख जगा रहे हैं. हादसे में दोनों पैर गंवाने वाले  गोपाल खंडेवाल अकेले रह कर बच्चों पढ़ाते है. मगर दिव्यांग होने के कारण आय का साधन नहीं होने से दवा और खाने को लेकर उन्हें समस्या हुई. इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी मिर्ज़ापुर को ट्विटर पर ट्वीट कर मदद मांगी.

ट्वीट के बाद मदद लेकर पहुंचे डीएम

गोपाल के ट्वीट पर संज्ञान लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारी मिर्ज़ापुर प्रवीण कुमार लक्षयकार खुद दिव्यांग से मिलने उनके घर पहुंचे. रोटरी क्लब(एलीट) की मदद से दिव्यांग गोपाल को उन्होंने हर महीने 6 हजार रुपये दो सालों तक दिलाने की भरोसा दिलाया. उन्होंने खुद पवन को 6 हजार रुपये भी दिए. वहीं डीएम ने गोपाल के चलाये जा रहे बच्चों की क्लास का भी निरीक्षण किया. डीएम का कहना था कि गोपाल को सरकारी योजनाओं की मदद भी दिलाई जाएंगी.ये भी पढ़ें: Unnao Case: यूपी पुलिस का खुलासा, एकतरफा प्यार में हत्या, कीटनाशक मिलाकर पिलाया पानी

वहीं डीएम से मिली मदद के बाद गोपाल भी खुश दिखाई दिए. उनका कहना था कि पहले भी ट्वीट करते रहे मगर मदद अब जा कर हुई है. बता दें कि गोपाल खंडेलवाल आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज में सीपीएमटी के जरिये सिलेक्शन होने के बाद 19 नवंबर 1996 को एडमिशन कराकर कार ड्राइव कर घर लौट रहे थे. उनका लखनऊ के पास हादसा हो गया. इसमें गोपाल की जिंदगी तो बच गयी मगर कमर से नीचे का हिस्से ने काम करना बंद कर दिया. गोपाल 3 साल तक अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे. डॉक्टर्स ने जवाब दे दिया और परिवार ने भी उनका साथ छोड़ दिया. तब एक दोस्त की मदद से गोपाल खंडेलवाल 1999 में वाराणसी से मिर्जापुर आ गये और क्षेत्र के बच्चों को निशुल्क पढ़ाने लगे.






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