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अमेरिका (USA) में इस समय सत्ता बदलाव के दौर में हैं.  जो बाइडन ( Joe Biden) के राष्ट्रपति  (President) चुने जाने की औपचारिक घोषणा के बाद सैकड़ों पदों में बदलाव हो रहे हैं. बहुत से पदों पर भारतीय मूल के व्यक्तियों कि नियुक्ति होने की बात चल रही है तो ट्राइंजीशन टीमों में भी भरतवंशियों की काफी संख्या है. अमेरिका के सर्जन जनरल (Surgeon General)के पद पर भी बाइडेन ने विवेक मूर्ति (Vivek Murthy) नाम के भारतीय मूल के डॉक्टर का नाम तय किया है.

ओबामा प्रशासन में रह चुके हैं इस पद पर
विवेक मूर्ति नया नाम नहीं है. इससे पहले मूर्ति बराक ओमाबा प्रशासनन में भी सर्जन जनरल रह चुके हैं. उस दौरान बाइडेन उप राष्ट्रपति पद पर रह चुके थे. अब चुने गए राष्ट्रपति बाइडन की यह घोषणा बिलकुल चौंकाने वाली नहीं हैं. बाइडेन की स्वास्थ्य की अगुआई हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस के सचिव जेवयर बेसेरा करेंगे.

कठिन चुनौती मिलेगी इस बारलेकिन मूर्ति के लिए इस बार हालात ओबामा प्रशासन से बहुत ही अलग मिलने वाले हैं. उनके सामने कोविड-19 महामारी से अमेरिका को उबारने की कठिन चुनौती होगी और उनके इस चुनौतीपूर्ण काम पर अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का पैनी नजर होगी. इस मामले में वे बाइडन के सबसे नजदीकी सलाहकारों में से एक होंगे.

ऐसा रहा पढ़ाई का सफर
विवेक मूर्ति यार्कशायर के हडर्सफील्ड में 10 जुलाई 1977 को पैदा हुए और तीन साल बाद अपने डॉक्टर माता-पिता के साथ मियामी में रहकर ही पले बढ़े जो कर्नाकट से अमेरिका गए थे. अपनी स्कूल की पढ़ाई मियाम के पालमेटो सीनियर हाई स्कूल में पूरी करने के बाद उन्होंने हार्वर्ड से बैचलर डिग्री हासिल की और येल से उन्होंने एमडी और एमबीए की डिग्री हासिल की. ब्रिघम, वुमन हॉस्पिटल और हावर्ड मेडिकल स्कूल में रेडिसेंसी ट्रेनिंग पूरी करने केबादवे इंटरनेल मेडिसिन फिजिशियन और इंस्ट्रक्टर बने.

ये खास अनुभव और योगदानमूर्ति को दो दशकों से अधिक समय का फिजिशयन, रिसर्च साइंटिसट और पब्लिक हेल्थ सर्विस कमिशन्ड कॉर्प्स में वाइस एडमिरल के तौर पर काम करने का अनुभव है. 1995 में एक पूर्व स्नातक रहते हुए है उन्होंने अपनी बहन रश्मि के साथ VISIONS वर्ल्डवाइड की स्थापना की थी. यह एक नॉन प्रॉफिट समूह है जो लोगों को भारत और अमेरिका में एड्स और एचआईवी मुद्दों पर शिक्षित करता है. 1997 में ग्रामीण भारत में महिलाओं को सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मी के तौर पर प्रशिक्षण देने के लिए स्वास्थ कम्यूनिटी हेल्ट पार्टनरशिप के वे सह संस्थापक रह चुके हैं.क्या है प्रेसीडेंशियल ट्रांजीशन और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद इसकी अहमियतओबामा से जुड़ेसाल 2008 में मूर्ति ने डॉक्टर्स फॉर ओबोमा की स्थापना तत्कालीन राष्ट्रपति उम्मीदवार बराक ओबोमा के समर्थन में बनाई इस गैर सरकारी संगठन में 16000 फिजिशियन और अमेरिका के सभी राज्यों के  मडिकल छात्र शामिल हैं.  इस संगठन का लक्ष्य सभी के लिए एक किफायती स्वास्थ्य सेवा सिस्टम को लाना था.

पिछले एक दशक में ये कार्य किए
साल 2011 में मूर्ति हेल्थ प्रिवेंशन, हेल्थ प्रोमोशम पर एडवाजरी ग्रुप के सदस्य बनाए गए. इसके बाद साल 2014 मसे 2017 तक अमेरिका के सर्जन जर्नल का पद संभाला. इस पद पर रहते हुए उन्होंने लोगों में हेल्दी लाइफस्टाइल का प्रचार करते हए ड्रग्स और शराब की लत के खिलाफ उल्लेखनीय कार्य किया और बच्चों में वैक्सनीनेशन के लिए खास तौर पर कार्य किया.

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चुनाव के पहले ही मूर्ति को बाइडन के कोरोना वायरस से निपटने वाली टीम के तीन प्रमुख सलाहकारों में से एक थे. उनका मानना है कि देश को अपने प्रयासों को लक्षित करना होगा, केवल लॉकडाउन काफी नहीं होगा. साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी समुचित ध्यान देना होगा. वे लॉकडाउन को अंतिम विकल्प के तौर पर देखते हैं.  वहीं सर्जन जनरल के तौर पर चुने जाने को एक मौके तौर पर देखते हैं जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी.



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