नई दिल्‍ली. जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय (JNU) में पीएचडी में दाखिले (PhD Admissions) को लेकर स्‍टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने दिल्‍ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) का दरवाजा खटखटाया है. एसएफआई ने जेएनयू में पीएचडी की 100 फीसदी सीटें जेआरएफ केटेगरी को देने के फैसले का विरोध जताया है और इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है. इस मामले में एडवोकेट अशोक अग्रवाल और कुमार उत्‍कर्ष ने जनहित याचिका दाखिल की है जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होगी.

इस जनहित याचिका में एसएफआई की ओर से कहा गया है कि शैक्षिक सत्र 2021-22 के लिए जेएनयू के सभी सात केंद्रों में पीएचडी की 100 फीसदी सीटों को जेआरएफ केटेगरी (JRF Category) के आवेदकों के लिए आवंटित कर दिया गया है और नॉन जेआरएफ (Non JRF) केटेगरी के छात्रों के लिए कोई सीट नहीं रखी गई है. जिससे बड़ी संख्‍या में छात्र पीएचडी (PhD) से वंचित रह जाएंगे.

इस बारे में एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने बताया कि यह भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का भी हनन है. पिछले साल तक जेएनयू में पीएचडी की सीटों को जेआरएफ केटेगरी से भरने के साथ ही नॉन जेआरएफ छात्रों के लिए प्रवेश परीक्षा की भी व्‍यवस्‍था थी लेकिन इस सत्र के लिए जेएनयू ने बिना किसी वैध तरीके को अपनाए अपने ई प्रॉस्‍पेक्‍टस (JNU E Prospectus) में सभी सीटों को जेआरएफ से भरने का फैसला किया है.

एडवोकेट कहते हैं कि जेएनयू के सात केंद्रों में सेंटर फॉर इंटरनेशनल ट्रेड एंड डेवलेपमेंट, पीएचडी इन ह्यूमन राइट्स स्‍टडीज, सेंटर फॉर इंग्लिश स्‍टडीज, सेंटर फॉर इंडियन लैंग्‍वेजेज (पीएचडी इन हिंदी, पीएचडी इन उर्दू, पीएचडी इन हिंदी ट्रांस्‍लेशन), सेंटर फॉर स्‍टडी फॉर लॉ, गवर्नेंस, स्‍पेशल सेंटर फॉर सिस्‍टम्‍स मेडिसिन और सेंटर फॉर वीमेन स्‍टडीज शामिल हैं, जहां नॉन जेएआरएफ छात्र पीएचडी नहीं कर सकते.

लिहाजा पहले से यहां प्रवेश परीक्षा देकर पीएचडी करते आ रहे नॉन जेएआरएफ छात्रों के लिए जेएनयू ने दरवाजे बंद कर दिए हैं. जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए. एडवोकेट अशोक कहते हैं कि जेएनयू में देशभर के छात्रों का पढ़ने का सपना होता है. ऐसे में एक ही श्रेणी के छात्रों के लिए सीटें आवंटित करने से बहुत सारे छात्रों का पढ़ाई का सपना अधूरा रह जाएगा.

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