वैक्सीनेशन प्रोग्राम को लेकर वीके पॉल ने ये बात कही है. (सांकेतिक तस्वीर)

वैक्सीनेशन प्रोग्राम को लेकर वीके पॉल ने ये बात कही है. (सांकेतिक तस्वीर)

न्यूज़18 से बातचीत में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा है कि हमें एक दिन में 1 करोड़ डोज के हिसाब से तैयारी करनी होगी, अगले कुछ हफ्तों में ये संभव हो जाएगा.

नई दिल्ली. देश में दूसरी लहर के साथ वैक्सीन की डिमांड को लेकर भी मांग तेज हो गई है. 18+ वालों के लिए वैक्सीनेशन की शुरुआत के साथ ही बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन हुए हैं. अब न्यूज़18 से बातचीत में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा है कि हमें एक दिन में 1 करोड़ डोज के हिसाब से तैयारी करनी होगी, अगले कुछ हफ्तों में ये संभव हो जाएगा. उन्होंने कहा- कल तक हमने 20 करोड़ वैक्सीन की डोज दी हैं. कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है. आने वाले समय में वैक्सीन प्रोडक्शन में और तेजी आएगी. राज्यों को भी हमारी वैक्सीन प्रोडक्शन क्षमता कितनी है. सप्लाई उपलब्ध कराई जा रही है डॉ. पाल ने बताया- जब स्टेट ने कहा कि वो फ्लैक्सिबिलिटी चाहते हैं तो दी गई. अब भी 50 फीसदी वैक्सीन केंद्र सरकार प्रोक्यूरमेंट करके राज्यों को देगी. बाकी 50 फीसदी राज्य और प्राइवेट सेक्टर खरीद सकते हैं. वैक्सीन की कम सप्लाई पर डॉ. पॉल बोले- ये कहना कि सप्लाई बंद हो गई है, ठीक नहीं होगा. सारे विश्व में वैक्सीन प्रोडक्शन की एक क्षमता है. जितनी विश्व में जरूरत है, क्षमता उससे कम है. ये miss match universe है.विदेशी कंपनियों पर वो बोले- हमने सभी कंपनियों से बातचीत की और कॉन्टैक्ट रखा. फाइजर के साथ तो करार भी किया कहा कि हमारे देश में सप्लाई के लिए प्रावधान करें. उनकी तरफ से ये इशारा दिया गया कि हम जहां मैन्यूफेक्चर कर रहे हैं वहीं करेंगे. जब भी निर्यात की संभावना निकलेगी, तब हम दे पाएंगे. कहने का मतलब है कि उनको शुरू से हिंदुस्तान में बुलाने की कोशिश चल रही है. हमें पता चला कि फाइजर मिल सकती है तो उस पर काम हुआ. मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन के साथ भी बातचीत चल रही है. फाइजर के साथ हम टीम की तरह काम कर रहे हैं. डॉ. पॉल ने कहा है कि भारत की जरूरत को ये सभी वैक्सीन मिलाकर भी पूरा नहीं कर सकतीं, इसीलिए हम भारत में ही बहुत बड़ी मात्रा में वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इन 2 के अलावा 4 और कंपनियां है जो इस पर काम कर रही हैं. फाइज़र के 5 करोड़ वैक्सीन डोज के वादे पर वो बोले- ये अभी विजिबल है. डेली बेसिस पर इसको देश में लाने की प्रक्रिया तेजी से पूरी हो ही है. जो भी उनकी requirement है वो सब पूरा हो रहा है. जल्द रास्ता निकलेगा. भारत की पॉलिसी शुरू से ये रही कि हमें उनपर काम करना है जिनको खतरा ज्यादा है. पहले 60 वर्ष से शुरू हुआ फिर 45 पर आए





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