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डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में चीन का हाथ रहा है. (फ़ाइल फोटो)

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में चीन का हाथ रहा है. (फ़ाइल फोटो)

China Cyber Attack in American’s Presidential Election: डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपनी चुनावी जीत का दावा करते हुए कहा कि हो सकता है कि चीन द्वारा करवाए गए इस साइबर हमले में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान इस्तेमाल हुई वोटिंग मशीनों को भी निशाना बनाया गया हो. इस कारण यह अमेरिका के लिए बहुत शर्मनाक है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    December 20, 2020, 5:11 PM IST

वाशिंगटन. अमेरिका के खिलाफ सबसे खतरनाक साइबर हमले (Cyber Attack) के पीछे किस देश का हाथ था, इस बात पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने फिर से अजीबोगरीब बयान देकर सबको हैरत में डाल दिया है. साइबर हमले के पीछे रूस के हाथ होने के माइक पोम्पियो (Mike Pompeo) जैसे स्टेट सेक्रटरी के बयान को काटते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने अमरीका पर हुए साइबर हमले में चीन का हाथ होने की बात कहकर फिर से एक नया शिगूफा छोड़ दिया है. ट्रंप ने अपनी चुनावी जीत का दावा करते हुए कहा कि हो सकता है कि चीन द्वारा करवाए गए इस साइबर हमले में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान इस्तेमाल हुई वोटिंग मशीनों को भी निशाना बनाया गया हो. इस कारण यह अमेरिका के लिए बहुत शर्मनाक है.

‘मीडिया में फेक न्यूज ज्यादा फैली हुई है’

उन्होंने कहा कि मेनस्ट्रीम मीडिया में साइबर हमले से जुडी खबरें फेक न्यूज़ भी ज्यादा फैली हुई हैं. उन्होंने मेनस्ट्रीम मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे जानबूझकर रूस का नाम उछाल रहे हैं क्योंकि आर्थिक कारणों के चलते वे चीन का नाम लेने से डरते हैं. उन्होंने कहा कि साइबर हमले के पीछे चीन का हाथ हो सकता है.

सायबर हमले ने फेडरल गर्वनमेंट के अंदरूनी नेटवर्क को प्रभावित कियासरकारी एजेंसियों का बयान एफबीआई (FBI) और सायबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी (Cybersecurity and Infrastructure Security Agency) ने इस सायबर हमले का खुलासा किया है, जिसने अमेरिका की फेडरल सरकार के भीतरी नेटवर्क को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया है. पोम्पियो ने अब तक के सबसे बड़े सायबर हमले के लिए रूसी सरकार को जिम्मेदार माना है.

क्या है यह सॉफ्टवेयर

SolarWinds कंपनी द्वारा विकसित ओरियन (Orion) नामक एक लोकप्रिय सॉफ्टवेयर को मार्च के शुरू में इसके अपग्रेड में एक दुर्भावनापूर्ण कोड सन्क द्वारा कम्प्राइज्ड किया गया था. यह सॉफ्टवेयर दुनिया भर में कंपनियों और सरकारी एजेंसियों को एक host के रूप में नेटवर्क-मॉनिटरिंग की सेवाएं प्रदान करता है. मैलवेयर ने हैकर्स को अपने कई टार्गेट्स के नेटवर्क तक रिमोट एक्सेस प्रदान किया है.

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माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ ने गुरूवार को प्रकाशित एक ब्लॉग पोस्ट में साइबर सुरक्षा पर हुए इस हमले को अमेरिका और इसकी सरकार और सुरक्षा फर्मों सहित अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों पर हमला बताया और कहा कि हमलावरों ने एक ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया है, जिसने व्यापक अर्थव्यवस्था की पूरी टेक्नोलॉजी सप्लाई चैन को जोखिम में डाल दिया है.



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