केसर (फूल) का नाम तो आपने सुना ही होगा.

जादू से भरा फूल है यह. आमतौर पर इसे जड़ी-बूटी कहा जाता है, लेकिन भारत सरकार ने इसे मसालों की श्रेणी में रखा हुआ है. केसर की विशेषता यह है कि यह खाने का रंग तो बदलेगा ही, उसका स्वाद भी शानदार कर देता है. गुणों से भरपूर है यह विश्व का सबसे महंगा मसाला. केसर कहां से आया, इसके पुख्ता प्रमाण नहीं है, लेकिन यह निश्चित है कि विश्व के सबसे प्राचीन देशों में ही इसकी उत्पत्ति हुई है. केसर का फूल ठंडे इलाकों में ही पैदा होता है, लेकिन इसका आकर्षण इतना अधिक है कि आमेर (राजस्थान-जयपुर) के राजपूत राजाओं ने अपने किले में इसे उगाने के लिए केसर-क्यारी बनवा दी थी.

केसर चूंकि बहुत ही महंगा मसाला है, इसलिए इतिहास के बजाय इसकी विशेषताएं हमारे लिए महत्वपूर्ण है. असल में इसकी गंध तीखी, परंतु परेशान करने वाली नहीं है और स्वाद में यह कुछ-कुछ कटु परंतु रुचिकर भी होता है. विशेष बात यह है कि भारत के कश्मीर के पंपोर जिले और जम्मू के किश्तवाड़ में भी इसे उगाया जाता है. भारत के प्राचीन ग्रंथों में केसर का वर्णन और विशेषताएं बताई गई हैं, वहां इसे कुमकुम भी कहा गया है. कश्मीर के कवि कल्हण द्वारा रचित संस्कृत ग्रंथ ‘राजतरंगिणी’ में केसर के फूलों की जानकारी दी गई है. राजतरंगिणी को भारत के इतिहास का प्रामाणिक ग्रंथ माना जाता है. इस ग्रंथ में राजाओं के इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है.

केसर को लेकर इतिहास की पुस्तकों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इसका उपयोग करीब 2 हजार साल से हो रहा है. इसकी उत्पत्ति ग्रीस, तुर्की, ईरान (फारस) और भारत में मानी गई है. अब इसकी खेती में स्पेन नंबर एक देश है. यूनानियों ने इसका उपयोग इत्र के तौर पर किया, जबकि अन्य देशों में इसका मसाले व जड़ी-बूटी के रूप में प्रयोग किया गया. असल में केसर का एक फूल होता है और उसके अंदर जो तीन बारीक डंडियां होती है, वही केसर कहलाती है. मोटे तौर पर हमें अगर एक किलो केसर चाहिए तो इसे लिए औसतन डेढ़ लाख केसर के फूलों की जरूरत होगी, वह भी तब, जब ये फूल उच्च क्वॉलिटी के हों.

भारत में केसर को जड़ी-बूटी के बजाय मसालों की श्रेणी में रखा गया है. केंद्र सरकार के जीएसटी विभाग ने मसाला मानकर ही इसे 5 प्रतिशत टैक्स की कैटिगरी में रखा है. देश के मसालों के सबसे बड़े थोक बाजार खारी बावली स्थित नौ-बहार (NB) मसालों के ओनर वीरेंद्र कुमार गुप्ता के अनुसार केसर का थोक भाव उसकी क्वॉलिटी के हिसाब से 1.20 लाख रुपये से लेकर 2 लाख रुपये किलो तक है. बाजार के ही कैलाशचंद्र वर्कवाला के संजय मित्तल बताते हैं कि रिेटेल में एक ग्राम केसर की कीमत 200 से 300 रुपये है. केसर के अन्य भाषाओं में नाम अलग-अलग हैं. जैसे उर्दू में जाफरान, कन्नड़ में कुंकुमकेसरी, कश्मीरी में कोंग, गुजराती में केसर, तमिल में कुंगुमपु, तेलुगु में कुन्कुमापुवु, बंगाली में जाफरान, मराठी में केसर, मलयालम में केसरम और अंग्रेजी में Saffron.

भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथों में केसर को उष्णवीर्य, उत्तेजक, पाचक, वात-कफ-नाशक और वेदनास्थापक (पीड़ाहारी) माना गया है. यह भोजन को पौष्टिक व स्वादिष्ट बनाता है. मुगलई डिश में इसका उपयोग आम है. आयुर्वेद-योग आचार्य व सरकारी अधिकारी डॉ. आरपी पराशर के अनुसार केसर में कैंसर बीमारी से बचाव के गुण हैं. यह दिमाग को दुरुस्त रखता है, नींद वाहक है और अल्जाइमर के मरीजों को लाभ देता है. केसर डिप्रेशन, एंग्जायटी व स्ट्रेस को भी कम करता है. इसके अलावा यह पाचक शक्ति को भी बढ़ाता है. गर्भवती महिलाएं अगर केसर के दूध का सेवन करें तो नॉर्मल डिलीवरी की संभावना रहती है. उन्होंने बताया कि केसर का अत्यधिक सेवन बस इतना नुकसान यह करता है कि आपको गरमी लगने लगेगी. केसर में कैल्शियम बहुत अधिक होता है, इसलिए इसे अधिक खाने से कब्ज की गंभीर परेशानी हो सकती है.


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