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दुनिया की 25 फीसदी आबादी को वर्ष 2022 तक कोविड-19 का टीका नहीं लग पाएगा. फोटो:AP

दुनिया की 25 फीसदी आबादी को वर्ष 2022 तक कोविड-19 का टीका नहीं लग पाएगा. फोटो:AP

Covid-19 Vaccination’s Reality: दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी (World’s One Fourth Population) को 2022 तक कोविड-19 का टीका (Covid-19 Vaccine) संभवत: नहीं मिल पाएगा. ‘द बीएमजे’ में बुधवार को प्रकाशित अध्ययन (Reasearch Published In The BMJ) में यह बताया गया है और सचेत किया गया है कि टीका वितरित करना, उसे विकसित करने जितना ही चुनौतीपूर्ण होगा.

वाशिंगटन. दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी (World’s One Fourth Population) को 2022 तक कोविड-19 का टीका (Covid-19 Vaccine) संभवत: नहीं मिल पाएगा. ‘द बीएमजे’ में बुधवार को प्रकाशित अध्ययन (Reasearch Published In The BMJ) में यह बताया गया है और सचेत किया गया है कि टीका वितरित करना, उसे विकसित करने जितना ही चुनौतीपूर्ण होगा.

दुनिया में 3.7 अरब लोग लगवाना चाहते हैं कोरोनावायरस का टीका

इसी पत्रिका में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में अनुमान जताया गया हो कि दुनियाभर में 3.7 अरब वयस्क कोविड-19 का टीका लगवाना चाहते हैं, जो खासकर कम और मध्यम आय वाले देशों में मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निष्पक्ष और न्यायसंगत रणनीतियां बनाने की महत्ता को रेखांकित करता है.ये अध्ययन दर्शाते हैं कि वैश्विक कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम की संचालनात्मक चुनौतियां टीका विकसित करने से जुड़ी वैज्ञानिक चुनौतियों जितनी ही मुश्किल होंगी.

‘अधिक आय वाले देशों ने अपनी आपूर्ति सुनिश्चत कर ली है’अमेरिका में ‘जॉन्स हॉप्किन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि यह अध्ययन बताता है कि अधिक आय वाले देशों ने किस प्रकार कोविड-19 टीकों की भविष्य में आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है, लेकिन शेष दुनिया में इनकी पहुंच अनिश्चित है. उन्होंने कहा कि टीकों की आधी से अधिक खुराक (51 प्रतिशत) अधिक आय वाले देशों को मिलेंगी, जो दुनिया की आबादी का 14 प्रतिशत हैं और बाकी बची खुराक कम एवं मध्यम आय वाले देशों को मिलेंगी, जबकि वे दुनिया की जनसंख्या का 85 प्रतिशत से अधिक हैं.

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अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी को वर्ष 2022 तक कोविड-19 का टीका संभवत: नहीं मिल पाएगा और यदि सभी टीका निर्माता अधिकतम निर्माण क्षमता तक पहुंचने में सफल हो जाए, तो भी 2022 तक दुनिया के कम से कम पांचवें हिस्से तक टीका नहीं पहुंच पाएगा.



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