करीब चार वर्ष पूर्व फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीन सगे भाइयो समेत चार को हत्या सहित अन्य आरोपो में दोषी ठहराते हुए सुनाई थी उम्र-कैद व अर्थदंड की सजा

दोष सिद्ध अभियुक्तों ने सेशन कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल कर हाईकोर्ट में दी है चुनौती,हाईकोर्ट की डबल बेंच ने ठुकराई जमानत अर्जी

वर्ष-2012 में प्रधानी व कोटे की रंजिश को लेकर लम्भुआ थाना क्षेत्र के ख़सडे गांव में गोली मारकर हुई थी धर्मेंद्र सिंह की हत्या

रिपोर्ट-अंकुश यादव

सुल्तानपुर/लखनऊ। प्रधानी व कोटे की रंजिश को लेकर करीब नौ वर्ष पूर्व हुई हत्या के मामले में सजायाफ्ता सगे भाइयों को हाईकोर्ट से भी झटका लगा है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सगे भाइयों की अपील पर सुनवाई के दौरान उन्हें जमानत पर रिहा किया जाना जायज ना मानते हुए उनकी अर्जी खारिज कर दी है।
मामला लम्भुआ थाना क्षेत्र के खसडे गांव से जुड़ा है। जहाँ के रहने वाले जगजीवन सिंह ने नौ जून 2012 की घटना बताते हुए मुकदमा दर्ज कराया। आरोप के मुताबिक अभियोगी का छोटा भाई भानु प्रताप सिंह घटना के दिन खेत की सिंचाई करवाने के लिए रघईपुर गांव गया था, जहां से लौटते समय रास्ते में मोटरसाइकिल सवार अनिल सिंह एवं उसके रिश्तेदार रितेश सिंह निवासी मानापुर थाना आसपुर देवसरा जिला प्रतापगढ़ ने भानु प्रताप को धक्का दे दिया, इस बात को भानु प्रताप ने अभियोगी जगजीवन से बताया ,जिसकी शिकायत करने अभियोगी अपने छोटे भाई धर्मेंद्र के साथ अनिल सिंह के बाबा राजबहादुर सिंह के पास गया और उनके घर जाकर पूरी बात बताई। जिस पर राज बहादुर सिंह अपने नाती अनिल सिंह को बुलाकर डांटने लगे तो अनिल सिंह को यह बात नगवांर गुजरी और वह भुनभुनाते हुए पुराने घर की तरफ भागा। अभियोगी के छोटे भाई धर्मेंद्र सिंह ने अनिल को दौड़ाकर पकड़ने का प्रयास किया तभी सामने से आए आरोपीगण सगे भाई पंकज सिंह, बृजेश सिंह ,सतीश सिंह उर्फ सोनू एवं उसके रिश्तेदार रितेश सिंह ने अपने हाथों में लिए हुए असलहों से धर्मेंद्र सिंह को दौड़ा लिया और प्रधानी व कोटे की रंजिश की बात कहते हुए उसे गोली मार दी, गोली लगने से धर्मेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे गंभीर हालत में इलाज के लिए ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर किया गया, जहां पर अगले दिन इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ और केस का ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला। वर्ष 2017 में 23 दिसंबर को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों को दोषी करार दिया और हत्या सहित अन्य आरोपों में आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा से दंडित किये जाने की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को दोष सिद्ध अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर चुनौती दी है। इसी मामले में दोषसिद्ध पंकज सिंह व बृजेश सिंह ने अपील पर सुनवाई के दौरान उन्हें जमानत पर रिहा करने की मांग की। वहीं अभियोजन पक्ष से एजीए बृजमोहन सहाय एवं अभियोजन पक्ष के निजी अधिवक्ता ने अपराध की गंभीरता को बताते हुए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाना उचित नहीं बताया और उनकी अर्जी खारिज करने की मांग की। मामले में सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं अजय कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने सगे भाइयों को जमानत पर रिहा किए जाने का पर्याप्त आधार ना पाते हुए उनकी अर्जी को खारिज कर दिया है। अदालत के इस आदेश से सेशन कोर्ट से झटका पाए दोषसिद्ध भाइयों को हाईकोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है। ऐसे में दोनो भाइयों को इस हत्या के मामले में अदालत से कोई राहत ना मिलने तक उन्हें जेल की सलाखों के पीछे ही जिंदगी गुजारनी पड़ेगी।

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