-5.2 C
New York
Sunday, February 5, 2023

Buy now

spot_img

पुलिसिया करतूत ने किया वर्दी को शर्मसार

पुलिसिया करतूत ने किया वर्दी को शर्मसार

अक्सर पुलिस झूठ बोलती है खुलासे का नाटक भी करती है फिर भी सब ठीक-ठाक है..

खुद की बचाव और ड्यूटी से खानापूर्ति इनकी कार्यशैली है

बनारस में दो साल से लापता शिव के पिता हार गए हैं। शिव त्रिवेदी को मृत घोषित कर दिया गया है। 13 फरवरी 2020 को वाराणसी की लंका पुलिस की एक टीम शिव को लेकर बीएचयू कैंपस से थाने आई थी। इसके बाद शिव लापता हो गया। पुलिस ने पहले कहा कि शिव को थाने लाया ही नहीं गया।

शिव के पिता बदहवास हालत में बनारस से लेकर बंगाल तक बेटे को ढूंढते रहे। 19 अगस्त 2020 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक वकील ने इस मामले में अदालत से मदद मांगी थी, जिसके बाद सीबीसीआईडी को जांच सौंप दी गई। अदालत में इस केस को लेकर वाराणसी के तत्कालीन पुलिस कप्तान अमित पाठक तक को पेश होना पड़ा। अमित पाठक की पुलिसिंग पर इनके ऊपर कई मामले में अंगुलियां उठती रही हैं चाहे अतुल राय से जुड़ा मामला जिसमें एक युवती ने लाइव वीडियो पोस्ट कर जीवन लीला समाप्त किया हो उसमें यह महोदय अभी भी जांच के दायरे में है सूत्र बताते हैं कि साहब कमाने के अलग-अलग बहाने व ठिकाने खोजते हैं !

कौन सी मजबूरी थी कि थाने वालों ने परिजन से झूठ बोला कहीं ऐसा तो नहीं कि पुलिस ही जिम्मेदार है… पूछ रहे हैं घरवाले क्या तुम्हारे अपने बच्चे नहीं हैं या नहीं होते जिनके कंधों पर थी सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्होंने ही लूट लिया शिव की जीवन की डारी…!

अब तमाम जांच के बाद पुलिस ने ये स्वीकार कर लिया है कि शिव को लंका थाना लाया गया था। जांच में यह भी पता चला है कि शिव के लापता होने के 3 दिन बाद वाराणसी के जमुना तालाब में जो अज्ञात शव मिला था वो शिव का ही था। शिव के इस शव की पहचान डीएनए और विसरा की जांच से हुई है। मध्य प्रदेश के रहने वाले प्रदीप त्रिवेदी का संघर्ष अब हार गया है। पुलिस वालों का एक और क्रूर चेहरा उजागर है। गंगा के किनारे अपने बेटे को खोजते पिता को अब पता चला है कि बेटा तो उसी दिन मर गया था।

पर सवाल है कि शिव ने अगर आत्महत्या करी तो उसने लंका थाने से निकलने के बाद 5-6 किलोमीटर दूर तालाब में ऐसा क्यों किया, जबकि 1 किलोमीटर दूर गंगा का पुल मौजूद था। दूसरा ये कि ऐसा क्या हुआ कि कैंपस में घूमता शिव अचानक थाने से निकलने के बाद मृत मिला।

शिव तालाब में पहुंचा या पुलिस ने मार कर पहुंचाया ऐसे कई सवाल..??

हालांकि थानेदार, सिपाही और कप्तानों को सस्पेंड होने से ज्यादा कोई सजा मिले ऐसा कोई न्याय मंदिर नहीं और ना ही कोई न्याय के देवता

शिव के पिता प्रदीप त्रिवेदी ने सभी मीडिया व सामाजिक लोगों से बेटे के लिए गुहार लगाई लेकिन कोई मददगार साबित नहीं हुआ आखिर एक गांव की पृष्ठभूमि से आने वाले दारोगा, सिपाही या अन्य पुलिस वाले आखिर इतने खूंखार या अमानवीय क्यों हो जाते हैं।

यह पहली घटना नहीं है जो वर्दी को शर्मसार करते नजर आ रही है इसके पहले भी कई ऐसी घटनाएं घटी हैं जिसने वर्दी की करतूत से समाजिक आंखें नम हुई हैं और न्याय तो दूर इनकी दरिंदगी का चेहरा सबके सामने आया है समय बदल गया 21वीं शताब्दी और तकनीकी यंत्र से लैश कर संसाधन को बढ़ाते हुए अपराध नियंत्रण के लिए नई नई कवायद जारी है लेकिन जब तक इनके अंदर जिम्मेदारी की भावना उत्पन्न नहीं होगी तब तक पुलिसिंग में सुधार नामुमकिन है बड़े-बड़े वादे और मीडिया के सहारे झूठे इरादे के रूप में खुलासा कर अपनी पीठ खुद थपथपाने का काम करते हैं लेकिन जब कभी भी पटल पर सच्चाई खंगाली जाती है तो हमेशा असफल नजर आते हैं कमिश्नरेट होने के बाद भी वाराणसी में दो नंबर का धंधा जैसे देह व्यापार हुक्का बार गांजा तस्करी और ट्रैफिकिंग का मामला धड़ल्ले से जारी है भागदौड़ की जिंदगी में पुलिस रोज अपनी जिम्मेदारी निभाती है लेकिन परिणाम अंततः शून्य स्थिति में होता है.. ऊंगली सबकी नियत पर नहीं बल्कि रक्षक बने भक्षक जो समाज के लिए कोढ़ हैं वर्दी के लिए अभिशाप उनपर है !!

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,698FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles