सुलतानपुर। जनपद के गोसाईगंज थाने से जुड़े बहुचर्चित तथाकथित फर्जी एफआईआर काण्ड में आज दिलचस्प मोड़ आ गया है। फेंक एफआईआर में आरोपित किये गये अनिल पाल ने मा0 उच्च न्यायालय में इलाहाबाद की खण्डपीठ लखनऊ का शरण लेते हुए फर्जी एफआईआर के विरूद्ध एक याचिका अधिवक्ता धीरेन्द्र कुमार मिश्रा के द्वारा दाखिल करायी है। दाखिल याचिका में याचिकाकर्ता द्वारा प्रमुख सचिव गृह, पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर, थानाध्यक्ष गोसाईगंज कथित तौर पर फर्जी रूप से दर्ज की गयी एफआईआर के वादी शुभम शर्मा समेत इंस्पेक्टर मनबोध तिवारी को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है, याचिकाकर्ता के द्वारा दाखिल मुकदमे पर न्यायालय द्वारा दिनांक 17 सितम्बर, 2021 को सुनवाई होना बताया जा रहा है। जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कम्प मचा हुआ है। थानाध्यक्ष मनबोध तिवारी की बात करें तो खुलकर जनपद में तैनाती के बाद विवादों से पुराना नाता रहा है। गोसाईगंज थानाध्यक्ष रहने के पूर्व कूरेभार थाने की कमान सम्भालने के दौरान भी मनबोध तिवारी के रवैये ने सुलतानपुर पुलिस की जमकर किरकिरी कराई थी। विदित रहे कि कूरेभार थाने पर चार्ज के दौरान मनबोध तिवारी द्वारा थाना क्षेत्र के बरौला ग्राम के निवासी बृजेश तिवारी उर्फ सोनू के घर पर पहुंच कर जमकर पुलिसिया कहर मचाया था, जिसका सजीव चित्रण सोनू के घर पर लगे सीसीटीवी कैमरे में वीडियो रिकार्ड हो गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा और तत्कालीन एसपी ने मनबोध तिवारी की छुट्टी कर दी थी, लेकिन इस बार तो कानून के पुजारी ने फर्जी एफआईआर दर्ज कर कानून को कायम रखने वाले महकमे को ही सवालिया घेरे में खड़ा कर दिया। चूंकि इस फर्जी एफआईआर काण्ड के तथाकथित वादी ने दर्ज एफआईआर के दिन ही अभियोग पंजीकृत होने से पूर्व ही नोट्रियल शपथ पत्र देते हुए किसी भी प्रकार के प्रार्थना पत्र देने से साफ तौर पर इंकार किया है, जिसकी प्रति पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर को जरिये रजिस्टर्ड डाक भेजा भी है। बावजूद इसके थाना गोसाईगंज पुलिस द्वारा 6 सितम्बर, 2021 की रात्रि 09ः40 पर संदिग्ध तहरीर पर अभियोग पंजीकृत करते हुए 7 सितम्बर 2021 को किसी अन्य व्यक्ति का मेडिको लीगल करा दिया गया है। शुभम शर्मा की मानें तो न ही तहरीर ही उसके द्वारा दी गयी है न तो किसी प्रकार का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर मेडिकल शुभम का नहीं हुआ तो मेडिकल में शुभम बनकर खड़ा कौन हुआ ? जिसका जवाब न तो थानाध्यक्ष दे पा रहे हैं न ही इस प्रकरण की जाँच कर रहे क्षेत्राधिकारी जयसिंहपुर के पास मौजूद है और हैरत की बात तो यह रही कि जिस थानाध्यक्ष ने एफआईआर दर्ज की उसके चार्ज के दौरान बरकरार रहते हुए जाँच प्रक्रिया को दिशा देना सूरज को दिया दिखाने के बराबर नजर आता दिख रहा है और परिणाम यह रहा कि लगभग एक सप्ताह बाद भी नतीजा ढाक के तीन पात रहा। मामला मा0 उच्च न्यायालय में जाने के बाद पुलिस महकमे में तो खलबली मची ही है तो दूसरी तरफ जनपद में बड़ी कार्यवाही की सुगबुगाहट देखी जा रही है। सूत्रों की मानें तो शुभम शर्मा के घर पर खाकीधारियों की चहल कदमी जोरों पर है लेकिन बीमार बाप अपने दुर्दशा के दंश को अपनी ही तकदीर पर छोड़ता नजर आ रहा है।

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