23 दिसम्बर 2011 को गनपत सहाय पीजी कालेज के प्राचार्य प्रताप बहादुर सिंह व उनके अंगरक्षक सुरेश सिंह की गोलियों से भूनकर हुई थी हत्या

अपर सत्र न्यायाधीश पंचम अभय श्रीवास्तव की अदालत ने सभी आरोपियों को ठहराया दोषी,बुधवार को सजा पर आएगा फैसला

रिपोर्ट-अंकुश यादव

सुलतानपुर। बहुचर्चित प्राचार्य प्रताप बहादुर सिंह एवं उनके अंगरक्षक हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने महा विद्यालय के चार कर्मी समेत पांच आरोपियों को हत्या सहित अन्य आरोपों में दोषी करार दिया है। अदालत ने पांचों दोषियों की सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए छह अक्टूबर की तारीख तय की है।
मामला कोतवाली नगर थाना क्षेत्र स्थित गनपत सहाय पीजी कॉलेज से जुड़ा है। जहां के प्राचार्य प्रताप बहादुर सिंह एवं साथ में मौजूद उनके अंगरक्षक सुरेश सिंह की 23 दिसंबर 2011 की सुबह ताबड़तोड़ गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कालेज के चपरासी जितेंद्र शुक्ला को नामजद करते हुए उसके अज्ञात साथियों के खिलाफ प्रतापगढ़ जिले की रहने वाली प्राचार्या की पत्नी कोकिला सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया। तफ्तीश के दौरान कालेज के स्टॉफ जितेंद्र प्रकाश मिश्रा, जितेंद्र शुक्ला,सौरभ मिश्र,अनिल मिश्रा एवं सह आरोपी दीपक तिवारी समेत अन्य का नाम सामने आया,फिलहाल इन्ही पांचों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल हुआ। घटना के पीछे वजह बताई गई कि वारदात के कुछ दिनों पहले प्राचार्य को विद्यालय में तैनात चपरासी जितेंद्र शुक्ला समेत अन्य को अपना करीबी बताते हुए पूर्व विधायक पवन पांडेय एवं उनके सहयोगियो के जरिए उनके पीछे ना पड़ने की बात कहते हुए सुधर जाने या फिर नौकरी छोड़कर चले जाने की धमकी दी जा रही थी। लगे आरोप के मुताबिक इस बात को लेकर प्रताप बहादुर सिंह घटना के कुछ दिनों पहले से ही तनाव में चल रहे थे और काफी डरे हुए थे, जिन्होंने इस्तीफे का भी मूड बना लिया था, फिलहाल यह सब कुछ चल ही रहा था कि 23 दिसंबर 2011 की सुबह विद्यालय में हो रहे बैक पेपर परीक्षा के निरीक्षण के लिए जा रहे होने के दौरान विद्यालय गेट के सामने ही प्राचार्य प्रताप बहादुर सिंह एवं उनके साथ मौजूद अंगरक्षक सुरेश सिंह की ताबड़तोड़ गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। इस मामले का विचारण करीब 10 वर्षों से चल रहा था जिसमें कई बार उतार-चढ़ाव आए और आरोपियों के जरिए विचारण में सहयोग न करने की भी बात सामने आई। मामले में विद्यालय के प्रबंधक ओमप्रकाश पांडेय उर्फ बजरंगी को भी बतौर अभियुक्त तलब करने की मांग की गई थी,फिलहाल कोर्ट ने अभियोजन की इस मांग को उचित न मानते हुए खारिज कर दिया था,जिसको लेकर अब भी हाईकोर्ट में मामला विचारधीन होना बताया जा रहा है। फिलहाल पांचों आरोपियों के खिलाफ मामले का विचारण एडीजे पंचम की अदालत में पूर्ण हुआ। इस दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपने साक्ष्यों एवं तर्कों को प्रस्तुत कर सभी आरोपियों को बेकसूर बताया,वहीं शासकीय अधिवक्ता संदीप सिंह ने 11 गवाहों व अन्य तर्को को पेश कर आरोपियों को ही घटना का जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें दोषी करार दिए जाने की मांग की। उभय पक्षो को सुनने के पश्चात सत्र न्यायाधीश अभय श्रीवास्तव ने पांचों आरोपियों हत्या सहित अन्य धाराओं में दोषी करार दिया है, जिनकी सजा पर सुनवाई के लिए बुधवार का दिन तय किया गया है।

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