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Wednesday, February 8, 2023

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‘भगवा वस्त्र की वजह से ताजमहल में नहीं जाने दिया’ – संत का दावा; हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

एएसआई के अधिकारी ने दावा किया कि संत को भगवा वस्त्र की वजह से नहीं रोका गया बल्कि उन्होंने स्वयं प्रवेश से इंकार कर दिया क्योंकि मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उनके ‘ब्रह्मदंड’ को लॉकर में जमा कराने का आग्रह किया था |

एएसआई के अधिकारी ने दावा किया कि संत को भगवा वस्त्र की वजह से नहीं रोका गया बल्कि उन्होंने स्वयं प्रवेश से इंकार कर दिया क्योंकि मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उनके ‘ब्रह्मदंड’ को लॉकर में जमा कराने का आग्रह किया था |


अयोध्या के संत द्वारा आगरा स्थित विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल में कथित तौर पर भगवा वस्त्र पहने होने की वजह से प्रवेश नहीं दिए जाने का दावा किए जाने के बाद हिंदूवादी संगठनों ने घटना पर नाराजगी जताई और बुधवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया. वहीं, एएसआई के अधिकारी ने दावा किया कि संत को भगवा वस्त्र की वजह से नहीं रोका गया बल्कि उन्होंने स्वयं प्रवेश से इंकार कर दिया क्योंकि मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उनके ‘ब्रह्मदंड’ को लॉकर में जमा कराने का आग्रह किया था.
हिंदू महासभा के प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कार्यालय पर पुलिस बल तैनात किया गया. हालांकि, बुधवार को भगवा वस्त्र पहनकर ताजमहल में प्रवेश करने के दौरान किसी को भी नहीं रोका गया हिंदूवादी संगठनों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को भगवा वस्त्र पहनकर ताजमहल के अंदर जाने से रोका नहीं जा सकता. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मंगलवार की घटना के विरोध में बुधवार को उन्होंने भगवा पहनकर ताजमहल में प्रवेश किया |

उनका आरोप है कि कुछ कर्मचारी जानबूझकर माहौल खराब करना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने संत को ताजमहल में जाने से रोकने का गलत कार्य किया है. प्रदर्शनकारियों ने ऐसा करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की इस संबंध में एएसआई के अधीक्षक डॉ.राजकुमार पटेल ने बताया कि बुधवार को उनके कार्यालय पर हिंदूवादी संगठनों ने धरना प्रदर्शन किया. उन्होंने बताया कि दो ज्ञापन हिंदू महासभा और बजरंग दल द्वारा दिये गए हैं उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी रंग के वस्त्र पहनकर ताजमहल देख सकते हैं और इस संबंध में कोई आपत्ति नहीं है. पटेल ने बताया कि अयोध्या के संत को भी नहीं रोका गया था, उनसे सिर्फ यह कहा गया था कि उनके साथ जो ‘दंड’ है वह उसे या तो लॉकर में जमा करायें या अपने किसी साथी को देकर जायें, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया और वापस लौट गए |

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