[ad_1]

भारतीय मूल के वैज्ञानिक दीपंजन पान ने एक पेपर बेस्ड टेस्ट किट विकसित किया है. (प्रतीकात्मक फोटो)

भारतीय मूल के वैज्ञानिक दीपंजन पान ने एक पेपर बेस्ड टेस्ट किट विकसित किया है. (प्रतीकात्मक फोटो)

Paper Based Test for Coronavirus: भारतीय मूल के वैज्ञानिक (Indian Origin Scientist) दीपंजन पान (Deepanjan Pan) ने यह दावा किया है कि उन्होंने एक पेपर बेस्ड टेस्ट किट विकसित किया है. उनका दावा है कि इसके जरिये पांच मिनट के अंदर किसी के भीतर मौजूद कोरोना वायरस का पता लगाया जा सकेगा.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    December 9, 2020, 6:21 PM IST

वॉशिंगटन. कोरोना वायरस (Coronavirus) को मात देने की दिशा में दुनिया भर के वैज्ञानिक लगे हुए हैं. ब्रिटेन, चीन और रूस में कोरोना की वैक्सीनेशन भी शुरू हो चुकी है. एक अच्छी खबर यह आ रही है कि भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक प्रोफेसर दिपंजन पान (Dipanjan Pan) के नेतृत्व में कोविड-19 का पेपर टेस्ट डेवलप किया गया है. इस पेपर टेस्ट में ‘इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर’ (paper-based electrochemical sensor) लगे होंगे जो पांच मिनट के अंदर कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगा लेंगे. जाहिर सी बात है कि अगर यह पेपर टेस्ट कामयाब हो जाता है तो करोड़ों लोगों को फायदा होगा.

एसीएस नैनो पत्रिका में प्रकाशित हुई रिपोर्ट
अमेरिका के इलिनॉयस विश्वविद्यालय के रिर्सचरों ने सार्स-सीओवी-2 के आनुवंशिक कणों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एक ‘इलेक्ट्रिकल रीड-आउट सेटअप’ के साथ एक ‘ग्राफीन-बेस्ड इलेक्ट्रो बायोसेंसर’ विकसित किया है. पत्रिका ‘एसीएस नैनो’ में प्रकाशित एक अनुसंधान के अनुसार, इस बायोसेंसर में दो घटक हैं- 1. ‘इलेक्टोरल रीड-आउट’ को मापने, 2. वायरल आरएनए की उपस्थिति का पता लगाने के लिए.

ये भी पढ़ें:अगर जूलियन असांजे अमेरिका पहुंचे तो हो सकती है उसे 175 साल की जेल!
पुरुषों के खेल में महिला ने मारी एंट्री, सऊदी अरब में अलखाल्दी ने बाज उड़ाया

प्रोफेसर दिपंजन पान के नेतृत्‍व में अनुसंधानकर्ताओं ने इसके निर्माण के लिए एक प्रवाहकीय फिल्म बनाने के लिए ‘ग्रेफीन नैनोप्लेटलेट्स’ की एक परत फिल्टर पेपर पर लगाई और फिर उन्होंने इलेक्ट्रिकल रीड-आउट के लिए एक संपर्क पैड के रूप में ग्राफीन के शीर्ष पर पूर्वनिर्धारित डिजाइन के साथ सोने का एक इलेक्ट्रोड रखा. सोने और ग्रेफीन दोनों में अधिक ‘सेंसिटिविटी’ और ‘कन्डक्टिवटी’ होती है, जो विद्युत संकेतों में परिवर्तन का पता लगाने के लिए इस प्लेटफ़ॉर्म को अल्ट्रासोनिक बनाता है. अनुसंधानकर्ताओं के दल को उम्मीद है कि कोविड-19 के अलावा इसका इस्तेमाल अलग-अलग बीमारियों का पता लगाने के लिए भी किया जा सकता है.



[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here