सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के बढ़ते मामलों पर कड़ा रुख अपना लिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के बढ़ते मामलों पर कड़ा रुख अपना लिया है.

भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ” हमें इसकी आदत हो गई है. ऑनलाइन सुनवाई को लेकर मैंने कुछ असाध्य समस्याओं को भी महसूस किया है और इनमें से एक है नई तरह की समानता, असमानता जो कि पैदा हो गई है.”

नई दिल्ली. सेवानिवृत्त हो रहे, भारत के प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे (Chief Justice of India SA Bobade) ने ऑनलाइन सुनवाइयों के दौरान नई तरह की ”समानता एवं असमानता” का उल्लेख करते हुए कहा कि ”अब न्याय तक पहुंच, तकनीक तक पहुंच पर निर्भर करती है.”

कोविड-19 महामारी (Covid-19 Epidemic) के काल में उच्चतम न्यायालय की कार्यशैली को बेहद तेजी से तकनीक की ओर ले जाने का श्रेय न्यायमूर्ति एस ए बोबड़े को जाता है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित अपने ऑनलाइन विदाई समारोह को संबोधित करते हुए भारत के 47वें प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान देश की शीर्ष अदालत का प्रदर्शन दुनिया में ”सर्वश्रेष्ठ” रहा क्योंकि इस घातक वायरस के कारण यह अदालत एक दिन के लिए भी बंद नहीं हुई.

हमें इसकी आदत हो गई हैः सीजेआई
उन्होंने कहा कि महामारी ने उच्चतम न्यायालय को संचार के नए माध्यमों के बारे में सीखने की आवश्यकता पर बल दिया और यह निर्णय लिया गया कि वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के साथ आगे बढ़ा जाए.ये भी पढ़ेंः- अब नहीं थमेगी सांसों की डोर, विशाखापट्टनम से नागपुर पहुंची ऑक्सीजन एक्सप्रेस…देखें PICS

भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ” हमें इसकी आदत हो गई है. ऑनलाइन सुनवाई को लेकर मैंने कुछ असाध्य समस्याओं को भी महसूस किया है और इनमें से एक है नई तरह की समानता, असमानता जो कि पैदा हो गई है.”

युवा वकीलों को किया संबोधित
महामारी के चलते दुखी महसूस करने वाले युवा वकीलों को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा, ” उम्मीद मत खोइए. जारी रखिए. चीजें बदलेंगी.” उन्होंने उल्लेख किया कि परिस्थितियां ऐसी हैं कि ”हम सभी तरह के आवश्यक उपकरण एवं तकनीक को अपना सकते हैं.”

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा, ” अगर हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ सहज नहीं होते हैं तो हम खुद को बड़े नुकसान में पाएंगे.”





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