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सोमदेव वर्मन ने पुलिस की बर्बरता का विरोध किया है

सोमदेव वर्मन ने पुलिस की बर्बरता का विरोध किया है

सोमदेव देवर्मन (Somdev devvarman) भारत (India) के लिए एशियन गेम्स (Asian Games) और कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में खेल चुके हैं

नई दिल्ली. पिछले कुछ दिनों में देश में पुलिस की बर्बरता की कई ऐसी कहानियां सामने आईं जिसने लोगों के बीच आक्रोश भर दिया. भारत के टेनिस खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन (Somdev Devvarman)  भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें लगता है कि भारत में पुलिस कई बार अपनी सीमाएं लांघ जाती है औऱ अपने अधिकारों का गलत फायदा उठाती है. सोमदेव ने बताया कि कैसे उन्हें भी बिना वजह एक बार पुलिस की इस तरह की बर्बता का शिकार होना पड़ा था. उन्होंने भारत में सालों से चले आ रहे जातिवाद की तुलना अमेरिका के नस्लवाद से की.

पुलिस की मार खा चुके हैं सोमदेव
इंडियन एक्सप्रेस के लिए लिखे अपने कॉलम में उन्होंने कहा, ‘भारत में पुलिस की बर्बरता सीमाएं लांघ चुकी है. यह भयानक हो चुकी है. वह अपनी ताकत का गलत फायदा उठाते हैं. हम पढ़ते हैं कि कैसे उन्होंने गांव जला दिए, लोगों को मारा जेल में डाल दिया और कैसे लोग पुलिस स्टेशन में मर जाते हैं. हैरानी इस बात की है कि यह सब हमें हैरान नहीं करता है. उनके ऐसे व्यवहार के लोग कई कारण देते हैं लेकिन मुझे कोई कारण समझ नहीं आता. हां, इस बात की राहत जरूर है कि हमारे देश में पुलिस के पास लाठी होती है गन नहीं.’

सोमदेव ने बताया कि कैसे एक बार वह अपने दोस्त के साथ कॉन्सर्ट में गए थे और केवल भीड़ का हिस्सा होने के कारण वह पुलिस के गुस्से का शिकार बन गए थे. उन्होंने लिखा, ‘ मैं अपने दोस्त के साथ कॉर्न्सट में था. हम बस कॉन्सर्ट में जा रहे थे तभी पुलिस आई और सबको मारना शुरू कर दिया. उन्हें नहीं था कि  लोग वहां कॉन्सर्ट के लिए आए हैं. बिना पूछे ही सबको लाठी से मारना शुरू कर दिया. सिर्फ भीड़ देखकर पुलिस का ऐसा करना मुझे सही नहीं लगता.’कोरोना के खौफ के बीच हुई इंटरनेशनल क्रिकेट की वापसी, वेस्‍टइंडीज ने इंग्‍लैंड को मात देकर जीता ऐतिहासिक मैच

नस्लवाद का हुए हैं शिकार
सोमदेव ने बताया कि अमेरिका की तरह वह भी अपने ही देश सालों से नस्लवाद का शिकार होते आए हैं. उन्होंने बताया कि नॉर्थईस्ट से होने के कारण लोग उन्हें शुरुआत से ही वॉचमैन और बहादुर जैसे नामों से बुलाते थे. आठ साल की उम्र में वह त्रिपुरा से चेन्नई आ गए लेकिन फिर भी उनके साथ यह होता रहा. यहां तक कि कई बार मैचों के दौरान उन्हें चाइनीज भी कहा जाता था जो उन्हें आज भी दुख पहुंचाता है. वहीं उनके साथ और दोस्त रहे दक्षिण भारत के बच्चों को उनके गहरे रंग के कारण चिढ़ाया जाता था.



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