कोतवाल एवं विवेचक ने एसीजेएम तृतीय कोर्ट से बीते 16 मई को जारी हुए पुलिस एक्ट के तलबी आदेश को जिला जज की कोर्ट में दी है चुनौती,राहत नहीं मिली तो हरकत में आकर कर दिया सरेंडर

इनोवा गाड़ी रिलीज मामले में कई पेशियों से आख्या भेजने में लापरवाही बरतने व आदेश की अवमानना पर जज श्रीमती सिद्दीकी साइमा जर्रार आलम की कोर्ट ने अपनाया है कड़ा रुख

लगातार बरती जा रही लापरवाही में खुद को फंसा देख कोतवाल एवं विवेचक ने आदेश की कापी रिसीव न कराने की बात कहकर पैरोकार पर ही फोड़ दिया सारा ठीकरा,यह मामला अन्य पैरोकारो के लिए भी बना सबक

पैरोकार पर लगे आरोप से टूटा विभागीय विश्वास,बिना लिखा-पढ़ी के कोई भी कागजात पुलिस अफसरों को देना पड़ सकता है भारी,हो जाएं सावधान ! मामला फंसने पर ऐसे ही टूट जाती है विभागीय यारी

रिपोर्ट-अंकुश यादव

सुलतानपुर/अमेठी। इनोवा रिलीज मामले में एसीजेएम तृतीय कोर्ट से घोर लापरवाही पर जारी हुए तलबी आदेश को जिला जज की कोर्ट में चुनौती देने वाले पुलिस एक्ट में फंसे गौरीगंज कोतवाल अंगद प्रताप सिंह ने आखिरकार सरेंडर कर ही दिया। जिनके घण्टो कस्टडी में रहने के बाद कोर्ट से जमानत अर्जी स्वीकार हुई। वहीं इसी केस में गैरहाजिर चल रहे विवेचक राजेश कुमार के खिलाफ जज श्रीमती सिद्दीकी साइमा जर्रार आलम की अदालत से कार्यवाही बरकरार है। दरोगा राजेश कुमार को एसीजेएम तृतीय कोर्ट ने कार्यवाही जारी कर चार जून के लिए तलब किया है।
मामला गौरीगंज कोतवाली क्षेत्र से जुड़ा है। जहां पर राजीव अरोड़ा की इनोवा कार के खिलाफ एक एक्सीडेंटल केस में 30 जुलाई 2021 को मुकदमा दर्ज हुआ। इस केस में फंसी राजीव अरोड़ा की इनोवा काफी दिनों से निरुद्ध रही। राजीव अरोड़ा की तरफ से गाड़ी रिलीज कराने को लेकर कोर्ट में अर्जी दी गई , जिसके क्रम में अदालत ने काफी दिनों पहले ही गौरीगंज कोतवाल से आख्या मांगी थी, लेकिन कई पेशी बीत जाने के बावजूद भी रिपोर्ट नहीं भेजी गई, यहां तक कि बीते 11 मई को अदालत ने नोटिस जारी कर 203-ए एमवी एक्ट की रिपोर्ट व अन्य आवश्यक रिपोर्ट के साथ कोतवाल को 13 मई के लिए व्यक्तिगत रूप से तलब भी किया था,फिर भी उन्होंने कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज किया और मामले को हल्के में लेते हुए वह गैरहाजिर रहे। इस लापरवाही के पीछे सरकारी कार्य व्यस्तता नहीं बल्कि रिपोर्ट भेजने के नाम पर अनुचित लाभ पाने की मंशा मानी जा रही है। शायद इसी चक्कर मे पुलिस इतनी अंधी हो गई कि उसने गाड़ी मालिक को अपनी पॉवर दिखाने के लिए कोर्ट आदेश को भी नजरअंदाज कर दिया और अपने लिए मुसीबत खड़ी कर ली। अदालत ने गौरीगंज कोतवाल और संबंधित विवेचक की इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया और बीते 16 मई को दोनो को तलब करने का आदेश जारी कर दिया। तलबी आदेश की जानकारी मिलने पर बौखलाए कोतवाल अंगद प्रताप सिंह एवं विवेचक राजेश कुमार ने कोर्ट आदेश की प्रति रिसीव न कराने का ठीकरा सम्बंधित पैरोकार पर ही फोड़ते हुए अपने को निर्दोष बता कर कोर्ट के तलबी आदेश को चुनौती दे डाली और बीते 26 मई को जिला एवं सत्र न्यायालय में उनके आदेश के खिलाफ निगरानी दाखिल कर दी। जिस पर सुनवाई करते हुए प्रभारी जिला न्यायाधीश ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 24 जून की तारीख नियत कर दी। कोर्ट आदेश को चुनौती देने के पीछे कोतवाल व विवेचक की यह मंशा रही कि उन्हें कोर्ट में सरेंडर न करना पड़े और उनकी साख मेन-टेन रहे, लेकिन सेशन कोर्ट से राहत नहीं मिली तो हरकत में आए कोतवाल ने एसीजेएम तृतीय की अदालत में अधिवक्ता रविवंश सिंह के माध्यम से सरेंडर कर दिया। अधिवक्ता की पैरवी के बाद घंटो कस्टडी में रहे कोतवाल को जमानत मिल पाई। अभी इस मामले में विवेचक राजेश कुमार गैरहाजिर ही चल रहे है, जिनके खिलाफ कोर्ट ने तलबी की कार्यवाही जारी कर चार जून के लिए तलब किया है। मामले में गोट फंसने पर अपने को निर्दोष बताने के चक्कर मे महज कुछ तिथियों की जीडी इंट्री को आधार बनाकर पैरोकार पर सारा ठीकरा फोड़ने की वजह से पैरोकारों एवं विभागीय अधिकारियों के बीच का विश्वास भी डगमगा गया है, जिससे अब हर थाने का पैरोकार भी बगैर लिखा-पढ़ी के कोई भी कागजात अपने अफसरों को देना सुरक्षित नहीं समझ रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसे ही मामला फंसने पर विभागीय अफसर अधीनस्थों पर ही सारा ठीकरा फोड़कर पल्ला झाड़ लेते है। फिलहाल इस मामले में कमी जिस स्तर पर रही हो,पर कोतवाल एवं विवेचक की कार्यशैली ने सभी पैरोकारों को सावधान कर दिया है।

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