माता-पिता की मौत के बाद अपनी दादी के साथ तीनों बहनें.

माता-पिता की मौत के बाद अपनी दादी के साथ तीनों बहनें.

बड़ी बेटी ने न सिर्फ अपने आंसू पोछे, बल्कि अपनी दोनों बहनों की हिम्मत बनकर खड़ी हो गई. इस बड़ी बेटी की भी उम्र महज सोलह साल है. लेकिन वह कहती है कि टीचर बनकर अपने माता-पिता को श्रद्धांजलि देगी.

मेरठ. कोरोना संक्रमण ने कई परिवार तबाह कर दिए, लेकिन वह इंसानी हौसले और हिम्मत को नहीं मार सकता. यह बात मेरठ की तीन बेटियों को देखकर बेहिचक कही जा सकती है. दरअसल, इन तीन बेटियों के माता-पिता की मौत महज दो दिन के अंतराल पर कोरोना संक्रमण से हो गई. माता-पिता की मृत्यु के बाद तीनों बच्चियां बिखर सी गईं. लेकिन बड़ी बेटी ने न सिर्फ अपने आंसू पोछे, बल्कि अपनी दोनों बहनों की हिम्मत बनकर खड़ी हो गई. इस बड़ी बेटी की भी उम्र महज सोलह साल है. लेकिन वह कहती है कि टीचर बनकर अपने माता-पिता को श्रद्धांजलि देगी.

बेटियों के सूखे आंसू, दादी का बह रहा दुख

ये तीनों बेटियां अपनी दादी के पास किराए के मकान में रह रही हैं. इन तीनों बेटियों की आंखों के आंसू सूख चुके हैं. लेकिन अपने बेटे और बहू को यादकर दादी जार-जार रो रही हैं. दादी बार-बार यही कह रही हैं कि इन तीन बेटियों का भविष्य क्या होगा.

दो दिन के भीतर कोरोना संक्रमण से माता-पिता की मौतइन बेटियों के पिता यतेंद्र की उम्र मात्र चालीस साल थी. वे मेरठ के मवाना स्थित बुड्ढा पीर में अपनी पत्नी और तीन बेटियों के साथ रहते थे. यतेन्द्र प्राइमरी स्कूल पाठशाला की जंगेठी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे, लेकिन बेटियों को हमेशा पढ़ाते रहे. लेकिन काल कब किसका दरवाजा खटखटा दे कोई नहीं जानता. इस परिवार पर भी 28 मई को पहला कहर टूटा, जब यतेंद्र की पत्नी नहीं रहीं. फिर दो दिन बाद ही यतेंद्र भी इस दुनिया से चल बसे. पति-पत्नी की मौत के बाद तीन बेटियों वाला यह परिवार असहाय हो गया. लेकिन बड़ी बिटिया ने खुद को भी समेटा और अपनी बहनों को भी इस कठिन समय से लड़ने का हौसला दिया.

बड़ी बेटी पलक ने छोटी बहन परी और आराध्या को दी हिम्मत

अपने माता-पिता पर नाज करने वाले सोलह साल की पलक, चौदह साल की परी और छह साल की आराध्या की हिम्मत की कहानी सुनकर सब सराहते हैं. इन तीनों बेटियों के हौसले के आगे मुसीबत भी पनाह मांग रही है. इन्होंने समाज के किसी भी शख्स से मदद नहीं मांगी, बस अपनी जिद और हिम्मत के साथ आगे बढ़ने की ठान चुकी हैं. लेकिन इसी बीच मेरठ जिला प्रशासन इन बच्चियों की मदद को सामने आ गया. मेरठ जिला प्रशासन ऐसे अनाथ हुए बच्चों की मदद में जुटा हुआ है.

मेरठ जिला प्रशासन आया मदद में

मेरठ में ऐसे अनाथ बच्चों के लिए जिला प्रशासन ने फुल एक्शन प्लान तैयार किया है. कोरोनाकाल के दौरान यहां कुल 65 बच्चों की पहचान की गई है. जिला प्रोबेशन अधिकारी ने 8273422540 और 8077583045 नंबर जारी किए हैं, जिनके जरिए ऐसे बच्चों की सूचनाएं दी जा सकती हैं. फिलहाल मेरठ में अब तक 65 बच्चे मिले हैं. इनमें से दो बच्चों के तो माता-पिता दोनों की मृत्यु हो गई है. बाकी 63 बच्चों के एकल अभिभावक हैं. उम्मीद है कि मुख्यमंत्री की मंशा का अनुरूप इन अनाथ बच्चों तक भी सरकारी मदद जरूर पहुंचेगी









Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here