बाबा नन्द महर धाम : अमेठी शाहगढ़ हिलोरे मारती आस्था और पूरा गंवई भारतीय रंग। ढेर सारी दुकानें। जहां तक नजर जाए बस सिर ही सिर। मान्यताएं अलग-अलग लेकिन एक बात पर सभी राजी।

कभी न कभी तो बाबा नंद, कन्हैया और बलदाऊ के साथ यहां आए ही थे। बाबा नंद के उसी पड़ाव स्थल पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आज भी जिले ही नहीं बल्कि कई जिलों के यदुवंशियों का जमावड़ा होता है।

सुल्तानपुर एक्सप्रेस

बाबा नंदमहर के धाम को लेकर न तो कोई ऐतिहासिक तथ्य है और न कोई पौराणिक आख्यान। मान्यताओं के आधार पर आस्थावान यहां जुटते हैं।

नगाड़ों की थाप पर आसमान छूते झंडे ऊपर वाले की बारगाह में अपनी इबादत दर्ज कराने के लिए जमीन छोड़ देने की कोशिश करते हैं तो आठ प्रकार की जय बोलकर राजा बलि और पवरिया महाराज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए यदुवंशी वातावरण को सुरम्य बना देते हैं।

मान्यताओं को माने तो ज्यादातर जानकार इसी पर एकमत हैं कि बाबा नंद ने यहां कभी पड़ाव किया था। बुजुर्ग बताते हैं कि बाबा नंद कन्हैया और बलदाऊ के साथ रामलला के दर्शन को अयोध्या जाते समय यहां रुककर विश्राम किया था।

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