काशी की ये रीति रिवाज उसे अविमुक्त क्षेत्र बनाते हैं. इसलिए आम से लेकर खास तक, संत से लेकर सन्यासी तक चिता भस्म को विभूति मानकर माथे पर लगाकर होली खेलते हैं. राग विराग की नगरी काशी की परंपराएं भी अजब और अनोखी हैं. रंगभरी एकादशी पर अड़भंगी बारात के साथ बाबा मां पार्वती का गौना कराकर ले जाते हैं और दूसरे दिन बाबा के गणों द्वारा ये होली खेली जाती है.



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