मामला बारीकला तहसील व परगना पट्टीजनपद प्रतापगढ़ का है जहां पीड़ित पक्ष वेद प्रकाश सिंह पुत्र बशिष्ट नारायण सिंह को उनके छोटे भाई मृतक आश्रित अध्यापक शेष नारायण सिंह ने यह कहते हुए मुंबई से बुलाया की स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की चिलबिला शाखा में सावधि खाते में मृतक पिता जी द्वारा जमा हुयी धनराशि मिलने वाली है कुछ हस्ताक्षर करने पड़ेंगे बहुत कम पढ़े लिखे पीड़ित वेद प्रकाश सिंह ने भाई पर भरोसा करते हुए कोरे कागज पर हस्ताक्षर कर दिए  उस हस्ताक्षर किये हुए कागज को शेष नारायण सिंह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से एक अनापत्ति पत्र यह कहते हुए दाखिल कर दिया की वेद प्रकाश अपने पिता द्वारा जमा की हुयी धनराशि को पुरे होशो हवास में अपने छोटे भाई शेष नारायण सिंह को दे रहे है पीड़ित पक्ष ने कोरे कागज के इस्तेमाल के द्वारा बने कागज की प्रतिलिपि को माँगा तो आना कानी करने लगे इसके उपरांत पीड़ित वेद प्रकश ने अधिवक्ता श्री कमलेश मिश्रा से मुलाकात कर छानबीन कराई तो सारी सच्चाई बाहर आ गयी मामले में अनापत्ति पत्र दाखिल कर न्यायधीश के संज्ञान में लाया गया और मामले में भारतीय दंड प्रकिया की धारा ४२० के तहत मांग की गयी है
हमारे प्रतिनिधि से बात करते हुए वेद प्रकाश सिंह ने बताया की एक पारिवारिक समझौते के तहत यह तय हुआ था की मृतक आश्रित की नौकरी जिस पर श्रेष्ठ पुत्र होने के नाते मेरा संवैधानिक हक़ था वो शेष नारायण करेंगे लेकिन पिताजी की जमा धन राशि में वो कोई धन नहीं लेंगे लेकिन जैसे ही नौकरी लगी वो धन राशि में अपना हिस्सा लगा लिए और अब तो हद करते हुए फर्जीवाड़े कर रहे है मैंने सिर्फ एक या दो पेपर पर हस्ताक्षर किये थे लेकिन न्यायालय के रजिस्टर में और मेरे आधार कार्ड की प्रतिलिपि में फर्जी हस्ताक्षर किये है अब इसी फैसले के आते ही यह स्पस्ट हो जायेगा की अगर वो धन लेते है तो नौकरी उनको छोड़नी पड़ेगी इसके अलावा शेष नारायण सरकारी जमीन पर हरे शीशम के पेड़ कटाने और राजनीती करने में स्टार कैम्पेनर कार्य करने के कारण उनके  के खिलाफ बेसिक शिक्षा अधिकारी से ३ शिकायत जनसुनवाई पोर्टल से और २ शिकायत व्यक्तिगत रूप से  ग्रामीणों द्वारा दी गयी है की वह अध्यापन का कार्य छोड़ कर गृह कार्य कृषि कार्य और राजनीती करते है और उनके स्थानांतरण की मांग की गयी है क्यूंकि उनका घर पुरे किसुनगिरि विद्यालय से महज २०० मीटर की दुरी पर है इस सम्बन्ध में बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रतापगढ़ सुधीर कुमार सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया था तो उन्होंने जांच का आश्वासन दिया  लेकिन न कोई जाँच की गयी न ही स्थानंतरण किया गया है इस मामले में पीड़ित भाई वेद प्रकाश सिंह जिनकी २ बेटियों की शादी के खर्च के रूप में यह धन मिलना था वो भाई के बेईमानी और फर्जीवाड़े की वजह से नहीं मिल रहा है

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