सुलतानपुर। वर्षों से अंग्रेजी शराब में मिलावट के साथ जिले में विधानसभा चुनाव बीतने के साथ ही पड़ोसी जनपद प्रतापगढ़ से जुडे़ सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब माफियाओं की सक्रियता से मेड इन कुण्डा का जलवा फिर से कायम होने लगा है। बेखौफ शराब तस्कर चन्द रूपयों की अवैध कमाई के चक्कर में स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग को डील कर जहरीली शराब के रूप के रूप में मौत बांट रहे है और लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के एक दर्जन से अधिक चर्चित ढाबों पर किसी भी समय बिना रोकटोक के मिलावटी शराब की बिक्री महंगे दामों पर की जा रही है। इन ढाबों पर रूकने वाले बाहरी यात्री और ट्रक ड्राईवर समय के बीच लाईसेंसी दुकान पर न पहुंच पाने के चक्कर में निर्धारित कीमत से अधिक पैसे चुकाकर मिलावटी शराब खरीदने को मजबूर हो रहे है।
उल्लेखनीय है कि पड़ोसी जनपद प्रतापगढ़ में मिलावटी अंग्रेजी शराब तैयार किए जाने में दर्जनों लोगों की भूमिका हमेशा पुलिस प्रशासन के लिए संदिग्ध रही है। इतना ही नही लॉकडाउन के दौरान पड़ोसी जनपद के शराब माफिया आबकारी विभाग की सेटिंग के चलते जिले में सक्रिय हुए और चॉदा क्षेत्र के सोनावा बार्डर से लेकर अमेठी जनपद के रामगंज बाजार तक अपने व्यापार का जाल फैला दिया। विधानसभा चुनाव के दौरान इन शराब माफियाओं की गतिविधियों पर अंकुश लगता दिखा, पर सरकार बनने के साथ ही पुराने विभागीय सम्बंधों की आड़ में शराब माफिया मिलावटी शराब के साथ जिले में फिर से सक्रिय हो गए।
इनसेट
आधे से कम रेट में मिल जाती है मेड इन कुण्डा
सुलतानपुर। लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर आधा दर्जन से अधिक ढाबों पर मिलावटी अंग्रेजी शराब अवैध रूप से बेचे जाने के पीछे की कहानी भी कम रोचक नही है। लाईसेंसी दुकान पर बिकने वाली अंग्रेजी शराब के आधे रेट पर मेड इन कुण्डा व्यापार करने वाले दुकानदारों को उपलब्ध कराई जाती है। इतना ही नही छापेमारी के दौरान जितनी शराब पकड़ी जाती है उसकी कीमत बाद में टुकड़ों में शराब माफियाओं द्वारा वसूला जाता है। सूत्रों की माने तो कुछ ब्रााण्ड जैसे रॉयल स्टैग की फुल बोतल की कीमत लाईसेंसी दुकान पर 680 रूपए है पर मेड इन कुण्डा निर्मित रॉयल स्टैग, ढाबा संचालको को 300 रूपए में उपलब्ध कराई जाती है और शासन द्वारा निर्धारित समय बीतने के बाद यही मेड इन कुण्डा विकेताओं द्वारा 800 से लेकर 1000 रूपए तक ग्राहको को बेची जाती है। लम्बे समय से चल रहे इस खेल को आबकारी विभाग जानते हुए भी अंजान बना हुआ है। मेड इन कुण्डा की बिक्री के बारे में आबकारी निरीक्षक सुभाष सिंह से बात करने का प्रयास किया गया पर उनसे दूरभाष पर सम्पर्क नहीं हो पाया। जिला आबकारी अधिकारी हितेन्द्र शेखर से इस सम्बंध में कार्यालय जाकर बात करने की कोशिश की गयी पर वे कार्यालय में उपलब्ध नही मिले।

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