सुलतानपुर। एमपी-एमएलए कोर्ट ने भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी को कड़ी चेतावनी देते हुए तीन दिन के भीतर साक्षी पुलिस अधिकारी का एक दिन का वेतन व यात्रा भत्ता न जमा करने पर उनके जिरह का अवसर स्वतः समाप्त हो जाने की सख्त चेतावनी दी है। स्पेशल जज एमपी-एमएलए कोर्ट पीके जयंत ने यह आदेश भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी एवं अन्य के खिलाफ चल रहे मुकदमे में विधायक की तरफ से लखनऊ से गवाही के लिए आए पुलिस अधिकारी से जिरह न करने एवं स्थगन प्रार्थना पत्र देने के चलते पड़ी बाधा पर अपनाया है। अदालत के इस चेतावनी भरे सख्त आदेश से भाजपा विधायक की सिरसर्दी बढ़ गई है।
मामला कोतवाली देहात थाना क्षेत्र से जुड़ा है। जहां के तत्कालीन थानाध्यक्ष आजाद सिंह केशरी ने बीते विधानसभा चुनाव के दौरान तीन फरवरी 2017 की घटना बताते हुए मुकदमा दर्ज कराया। आरोप के मुताबिक आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के चलते अपने कार्यकर्ता को पुलिस के जरिये पकड़े जाने की सूचना पर पहले थानाध्यक्ष आजाद सिंह केशरी के सीयूजी नंबर पर तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी देवमणि द्विवेदी के जरिए फोन करके धमकी भरे लहजे में बात की गई,उसी के कुछ देर बाद अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचकर बवाल करते हुए पुलिस अधिकारी व चुनाव ड्यूटी में लगे अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों को भला बुरा कहा गया। इस घटना के सम्बंध में तत्कालीन थानाध्यक्ष आजाद सिंह केशरी की तहरीर पर वर्तमान भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी सहित पांच लोगो के खिलाफ नामजद एवं 25-30 अज्ञात समर्थको के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। मामले में विधायक एवं सह अभियुक्त नीरज द्विवेदी, रामप्रताप,बृजेश सिंह,अशोक सिंह समेत अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र कोर्ट में दाखिल हुआ। मामले का विचारण एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा है। इसी मामले में शुक्रवार को वादी मुकदमा व साक्षी आजाद सिंह केशरी लखनऊ से गवाही देने के लिए अदालत पहुंचे। जिनका मुख्य बयान अदालत में दर्ज हुआ, लेकिन जिरह की बात आई तो विधायक देवमणि द्विवेदी के पक्ष से अवसर मांगते हुए स्थगन प्रार्थना पत्र दे दिया गया। विधायक की तरफ से स्थगन अर्जी पड़ने के चलते मुकदमे की कार्यवाही बाधित हुई और कीमती समय देकर लखनऊ से आए साक्षी पुलिस अधिकारी को पुनः कोर्ट आने की स्थिति भी उत्पन्न हो गई। अदालत के सामने पूछे जाने पर आजाद सिंह केशरी ने अपना महीने का मूल वेतन 80 हजार एवं अन्य भत्ता बताया। जिस पर अदालत ने विधायक की तरफ से लिए गए स्थगन की वजह से उनके खिलाफ खड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस अधिकारी का एक दिन का वेतन एवं यात्रा भत्ता की धनराशि जमा करने का आदेश दिया है। वह भी अदालत ने यह अर्थदंड की धनराशि आदेश से तीन दिन के भीतर न जमा करने पर जिरह का अवसर स्वतः समाप्त हो जाने की शर्त भी रखी है। मामले में जिरह के बिंदु पर अगली सुनवाई के लिए 13 सितम्बर की तारीख तय की गई है। ऐसे में कोर्ट के इस चेतावनी भरे आदेश से विधायक देवमणि द्विवेदी को जिरह के लिए अवसर मांगना महंगा पड़ गया है।

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