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Wednesday, February 8, 2023

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विवाहिता को जलाकर मौत के घाट उतारने के दोषी पति,जेठ व सास को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास

एडीजे प्रथम जज इंतेखाब आलम की अदालत ने तीनो आरोपियो को ठहराया है दोषी,10-10 हजार का ठोंका अर्थदंड

करीब सवा छह साल पहले मृतका के पिता ने बेटी को जलाकर मार डालने समेत अन्य आरोपो मे ससुरालीजनों के खिलाफ दर्ज कराया था मुकदमा,सजा पर आया फैसला

रिपोर्ट-अंकुश यादव

सुलतानपुर। करीब सवा छह साल पहले विवाहिता को जलाकर मौत के घाट उतारने के आरोपी पति,जेठ व सास को एडीजे-प्रथम जज इंतेखाब आलम की अदालत ने दहेज हत्या सहित अन्य आरोपो में दोषी ठहराया है। जिन्हें अदालत ने दस-दस वर्ष के कठोर कारावास एवं दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मामला कुड़वार थाना क्षेत्र स्थित पासिनका पुरवा-कोटिया गांव से जुड़ा है। जहां के रहने वाले राजू के साथ गौरीगंज थाना क्षेत्र के मऊ पूरे बाबू निवासी अभियोगी भोलानाथ ने घटना के करीब पांच वर्ष पूर्व अपनी बेटी सुनीता का विवाह संपन्न कराया था। आरोप के मुताबिक ससुरालीजनों ने मनमुताबिक दहेज की डिमांड न पूरी होने के चलते सास-सूरसती के ललकारने पर 11 जनवरी 2016 को सुनीता को जला दिया था,जिससे वह बुरे तरीके से झुलस गई थी,जिसे इलाज के लिए जिला अस्पताल-सुलतानपुर में भर्ती कराया गया था। जानकारी मिलने पर अभियोगी पहुँचा तो सुनीता ने आरोपी ससुरालीजनों के जरिये वारदात को अंजाम देने की बात बताई थी,जिसके पश्चात इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस मामले में आरोपी पति राजू,जेठ-संजय, ससुर-शिवकुमार पासी व सास-सूरसती के खिलाफ दहेज हत्या सहित अन्य आरोपो में मुकदमा दर्ज हुआ। मामले में आरोपियो के खिलाफ दहेज हत्या समेत अन्य आरोपो में चार्जशीट दाखिल हुई। मामले का विचारण एडीजे प्रथम की अदालत में चला। दौरान विचारण आरोपी ससुर-शिवकुमार की मृत्यु हो गई,शेष तीन आरोपियों के खिलाफ विचारण पूर्ण हुआ। इस दौरान शासकीय अधिवक्ता पवन कुमार दूबे ने 11 अभियोजन गवाहों को परीक्षित कराया और आरोपियो को ही दोषी ठहराने के लिए भरपूर पैरवी की। वहीं बचाव पक्ष ने अपने साक्ष्यों एवं तर्कों को प्रस्तुत कर आरोपियो को बेकसूर बताया। मामले में उभय पक्षों को सुनने के पश्चात एडीजे प्रथम जज इंतेखाब आलम की अदालत ने आरोपी पति,जेठ व सास को प्रताड़ना व दहेज हत्या के आरोप में दोषी करार दिया। जिनकी सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सभी दोषियों को दस-दस वर्ष के कठोर कारावास एवं 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सात वर्षीय मासूम को हबस का शिकार बनाने के दोषी ‘श्यामलाल मौर्य’ को उम्र-कैद व 52 हजार का अर्थदंड

स्पेशल जज पाक्सों एक्ट पवन कुमार शर्मा की अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सुनाई कठोर कारावास काटने की सजा

करीब सवा दो साल पहले जगदीशपुर थाने में मासूम के दादा की तहरीर पर दर्ज हुई थी एफआईआर,घटना के बाद से ही श्यामलाल काट रहा जेल,नहीं मिली सकी थी बेल

चार्जशीट दाखिल होने के बाद सात नवम्बर 2020 को चार्ज बनने पर शुरू हुआ ट्रायल,कोर्ट की सक्रियता से करीब डेढ़ वर्ष में ट्रायल हुआ पूरा,पीड़ित पक्ष को मिला न्याय,दोषी को मिली करनी की सजा

रिपोर्ट-अंकुश यादव

सुलतानपुर। सात वर्षीय मासूम को हबस का शिकार बनाने के मामले में स्पेशल जज पाक्सो एक्ट की अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया है। स्पेशल जज पवन कुमार शर्मा की अदालत ने दोषी श्यामलाल मौर्य को ताउम्र कठोर कारावास की सजा काटने एवं 52 हजार रूपए अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।
मालूम हो कि सात वर्षीय मासूम के दादा ने 18 फरवरी 2020 को हुई घटना का जिक्र करते हुए जगदीशपुर थाना क्षेत्र स्थित पूरबगांव निवासी आरोपी श्यामलाल मौर्य के खिलाफ़ घर मे अकेला पाकर अपनी सात वर्षीय मासूम नतिनी के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया। मामले में आरोपी श्यामलाल को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्यवाही की गई और विवेचक ने तफ्तीश पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल किया। सात नवम्बर 2020 को कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ चार्ज-फ्रेम कर मामले का ट्रायल शुरू किया। मामले का विचारण स्पेशल जज पाक्सों एक्ट की अदालत में चला। मालूम हो कि घटना के बाद श्यामलाल जेल भेजा गया,जिसे काफी प्रयासों व पैरवी के बाद भी जमानत ही नहीं मिल सकी और इधर ट्रायल पूरा भी हो गया। ट्रायल के दौरान बचाव पक्ष ने अपने साक्ष्यों एवं तर्कों को प्रस्तुत कर आरोपी को बेकसूर बताया। वहीं अभियोजन पक्ष से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक सीएल द्विवेदी ने अभियोजन गवाहों एवं अन्य साक्ष्यों को प्रस्तुत करते हुए आरोपी श्यामलाल मौर्य को घटना का जिम्मेदार ठहराया और उसे दोषी ठहराकर कड़ी से कड़ी सजा से दण्डित किये जाने की मांग की। उभय पक्षों को सुनने के पश्चात स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट पवन कुमार शर्मा की अदालत ने आरोपी श्यामलाल को दोषी ठहराते हुए उसे आजीवन कठोर कारावास की सजा भुगतने एवं 52 हजार रूपए अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। अदालत ने अर्थदंड के धनराशि की 75 प्रतिशत रकम पीड़ित पक्ष को देने का आदेश पारित किया है।

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