भारतीय फुटबॉल टीम के कोच भारत की हार पर रो पड़े थे (Indian Football Team/Instagram)

भारतीय फुटबॉल टीम के कोच भारत की हार पर रो पड़े थे (Indian Football Team/Instagram)

भारतीय फुटबॉल टीम के मुख्य कोच इगोर स्टिमक ने बुधवार को खुलासा किया कि अपनी टीम के 2019 में विश्व कप क्वॉलिफायर के शुरुआती मैच के फुटेज देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए थे.

दुबई. भारतीय फुटबॉल टीम के मुख्य कोच इगोर स्टिमक ने बुधवार को खुलासा किया कि अपनी टीम के 2019 में विश्व कप क्वॉलिफायर के शुरुआती मैच के फुटेज देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गये थे, क्योंकि 82वें मिनट तक बढ़त कायम रखने के बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. भारत ने सितंबर 2019 में गुवाहाटी में ओमान के खिलाफ 2022 विश्व कप क्वॉलिफायर के पहले मैच में 24वें मिनट में करिश्माई सुनील छेत्री की बदौलत 1-0 से बढ़त बना ली थी, लेकिन विपक्षी टीम ने अंत में दो गोल कर जीत हासिल कर ली थी.

स्टिमक ने वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ”पिछले मैचों को देखकर मैं कई बार रो चुका हूं. ओमान के खिलाफ पहला मैच काफी अहम था, उस मैच से फैसला होना था कि हम ग्रुप में पहले दो स्थान (और अगले दौर के लिए क्वालीफाई करने) के लिए मुकाबला करेंगे या नहीं.”

उन्होंने कहा, ” दुर्भाग्य या इस तरह के महत्वपूर्ण मैचों में खिलाड़ियों के अनुभव की कमी के कारण हम हार गए और इस वजह से मैं हमेशा रोऊंगा.” स्टिमक ने गुरुवार को यहां ओमान के खिलाफ भारत के अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच से पहले कहा, ”मुझे अफसोस हुआ, खुद के लिए नहीं कि मैंने अपने करियर के दौरान इसी तरह की परिस्थितियों का सामना किया है बल्कि खिलाड़ियों के लिए.”

स्टिमक ने कहा कि आई लीग में कोई भी अच्छा खिलाड़ी नहीं खेल रहा है, जिसे राष्ट्रीय टीम के लिए चुना जा सकता था. 27 सदस्यीय टीम के सभी खिलाड़ी इंडियन सुपर लीग से हैं जो देश की शीर्ष स्तरीय फुटबॉल लीग बन गई है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण हुई बाधा के बाद टीम शुरू से ही शुरूआत कर रही है और कहा कि वह इन दो मैत्री मैचों में खिलाड़ियों से ज्यादा की उम्मीद नहीं करेंगे. भारत को सोमवार को दूसरा मैत्री मैच संयुक्त अरब अमीरात से खेलना है.उन्होंने कहा, ”हम पिछले साल काफी चीजों की योजना बना रहे थे, जैसे सत्र के कार्यक्रम में बदलाव, ज्यादा मैच, सुपर कप आदि. लेकिन महामारी ने सारी योजना विफल कर दी. टीम को शुरूआत करनी पड़ी, हालांकि खिलाड़ी आईएसएल में खेल चुके हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय मैच बिलकुल अलग होते हैं.” उन्होंने कहा, ”हम उन्हें मजबूत टीमों के साथ खेलने का अनुभव देना चाहते थे, जिससे उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी और भविष्य में वे निडर होकर खेल सकेंगे. मैंने उन्हें कहा कि उन पर कोई दबाव नहीं होना चाहिए.”









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