विधायक विनोद सिंह ने डीएम को लिखा पत्र

पालिका के शासकीय कार्यों में अध्यक्ष के पति अजय जयसवाल द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप पर जताई नाराजगी

अधिशासी अधिकारी ने नपा अध्यक्ष के पति अजय जयसवाल को नगर पालिका में प्रवेश पर लगाई रोक

पत्रावली अवलोकन व छेड़छाड़ करते हुए वायरल हुआ था नपा अध्यक्ष के पति अजय जयसवाल का वीडियो

सुल्तानपुर ….नगर पालिका अध्यक्ष बबिता जायसवाल व उनके पति अजय जयसवाल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं । गुरुवार को अधिशासी अधिकारी ने एक पत्र जारी कर नपा अध्यक्ष के पति अजय जयसवाल को अनावश्यक नगर पालिका में घुसने पर रोक लगा दी । सुल्तानपुर विधायक विनोद सिंह द्वारा अक्टूबर 2010 के शासनादेश व उच्च न्यायालय के आदेश के साथ पालिका चेंबर में अध्यक्ष की गैरमौजूदगी में सरकारी पत्र वलियों की जांच करते उनका अवलोकन करते वीडियो भेज कर जिलाधिकारी रवीश गुप्ता को उच्च न्यायालय के आदेश का पालन कराने के लिए कहा गया था । एक और जहां दो दर्जन के करीब सभासद पालिका अध्यक्ष व उनके पति पर भ्रष्टाचार , मनमाने पन , सरकारी कागजों में छेड़छाड़ , सरकारी काम में बाधा , बोर्ड बैठकों को मनमाने एजेंडे से चलाने का आरोप लगाते हुए लगातार तीन बैठकों का बहिष्कार कर शासन और प्रशासन में बड़ी चुनौती खड़ा कर रहे हैं । वही पालिका अध्यक्ष के पति के कारनामों की कड़ियां खुलने लगी है । अभी सभासद प्रतिनिधि से चेंबर में मारपीट का मामला न्यायालय पहुंचा जिसमें बड़ी मुश्किल से नपा अध्यक्ष व उनके पति को जमानत मिली थी । इसके तुरंत बाद बीते वर्ष 19 मई के घटना में जहां रसूख का इस्तेमाल कर नगर कोतवाल से सेटिंग कराकर पाक्सो जैसे मामले में अंतिम रिपोर्ट लगाकर बड़ी खुशी मना रहे थे । वही स्पेशल जज पवन कुमार शर्मा ने नगर कोतवाल की फाइनल रिपोर्ट में विवेचक नगर कोतवाल की मनमानी पर वह लचर तफ्तीश पर आधारित रिपोर्ट देखते हुए नगर कोतवाल पर ही मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया है । उक्त घटना में शामिल चेयरमैन व उनके पति की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ने लगी है । इसी बीच सन 2012 का शासनादेश व हाईकोर्ट का आदेश जिन्न बनकर सामने आया है। अधिशासी अधिकारी ने जिलाधिकारी से प्राप्त हुए पत्र के आधार पर पालिका अध्यक्ष के पति अजय जयसवाल को नगर पालिका परिषद में अनावश्यक प्रवेश करने , सरकारी कागजातों का मुआयना करने , कर्मचारियों पर हुकूमत , ट्रांसफर पोस्टिंग , खारिज दाखिल , खरीद-फरोख्त , टेंडर में हस्तक्षेप पर रोक लगा दी है । पत्र में उन्होंने कहा यदि बहुत आवश्यक है तो वह अधिशासी अधिकारी से उनके चेंबर में मुलाकात कर सकते हैं । इसके अतिरिक्त उन्हें नगर पालिका के किसी कार्य में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं रहेगा । पत्र जारी होने के बाद जहां नगरपालिका के कर्मचारियों ने राहत की सांस ली वही सभासदों ने भी इसे लोकतंत्र और कानून की बड़ी विजय बताया । यहां नगर पालिका के कर्मचारी दबी जबान में कहते हैं पिछले साढे 4 सालों से नगर पालिका गुलामी के दौर से गुजर रहा है । कर्मचारियों के सम्मान की बात तो छोड़िए बात-बात में कर्मचारियों को इनके द्वारा जलील किया जाना , मनमाने ढंग से निर्णय लेना , खारिज दाखिल में जबरन अपना अधिकार जताना , ठेके , पट्टे में अपने चहेती फर्म को ठेका देना , सफाई , बिजली , पानी जैसे मुद्दों पर अनावश्यक हस्तक्षेप करना जारी था । शासन द्वारा पत्र दिए जाने के बाद अब नगर पालिका के कर्मचारी स्वतंत्र रूप से जनहित के कामों को पूरा करेंगे । उधर आदेश से मिलाई चेयरमैन पति अजय जयसवाल गुरुवार को नगर पालिका पहुंचे और अधिशासी अधिकारी के आवास पर पहुंचकर आधे घंटे आदेश को लेकर अधिशासी अधिकारी से बहस की बाद में निराश होकर वापस लौट गए ।
इनसेट….. जानिए ऐसा है पत्र का मजमून
पत्र का मजमून कुछ इस प्रकार है
श्रीमती बबीता जयसवाल
अध्यक्ष
नगर पालिका परिषद सुल्तानपुर
महोदया
आपके पति श्री अजय जयसवाल के खिलाफ माननीय विधायक विनोद सिंह द्वारा इस आशय से पत्र लिखकर शिकायत की गई है कि आपके पति श्री अजय जयसवाल ने पिछले साढे 4 सालों से नगर पालिका में आपका स्वयंभू प्रतिनिधि घोषित कर रखा है । और नगर पालिका कार्यालय में उपस्थित होकर शासकीय कार्यों में अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप करते रहते हैं । बैठकों में शामिल होकर अपने मत को अभिव्यक्त करना व सभासदों को प्रभाव में लाने की कोशिश करना इनके आदत में शामिल है । कार्यालय के कर्मचारियों को अध्यक्ष के रूतबे से डरा धमका कर कर्मचारियों से विधि विरुद्ध कार्य करवाना उनके द्वारा निरंतर जारी है । मैं आपको एक पत्र के साथ वीडियो क्लिप दे रहा हूं जिसमें अजय जयसवाल नगर पालिका कार्यालय में बैठकर सरकारी प्रपत्र में छेड़छाड़ कर रहे हैं । उनकी ऐसी अनेक वारदातें हैं इसका वीडियो क्लिप मौजूद है । अतः यह पत्र इस अनुरोध के साथ प्रेषित है कि आप अपने पति अजय जयसवाल को अवगत कराएं की वह अनावश्यक रूप से कार्यालय ना आए । यदि कोई आवश्यक कार्य हो तो कार्य कर तुरंत चले जाएं । यदि ज्यादा आवश्यक हो तो अधिशासी अधिकारी के अतिरिक्त किसी कर्मचारी से वार्ता ना करें । यह भी उल्लेखनीय है कि आपके पति अजय जायसवाल द्वारा सरकारी पत्रावली का अवलोकन किया जाता रहा है । जिस के संबंध में माननीय विधायक जी द्वारा एक वीडियो भी भेजा गया है । बिना अधिशासी अधिकारी की उपस्थिति में किसी भी सरकारी दस्तावेज को देखना उसमें छेड़छाड़ करना शासनादेश संख्या 983/9.1.96 /8ई/95 दिनांक 15 फरवरी 1996 शासनादेश संख्या 3965/9.1.96/8ई/95 दिनांक 28 जून 1996 एवं शासनादेश संख्या 3859/9.1.96/8ई/95 दिनांक 23 दिसंबर 2010 के विरुद्ध है । जिलाधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र के आलोक में आप व्यक्तिगत रूप से अपने पति श्री अजय जयसवाल को अनावश्यक सर पालिका में आने से रोक दें ।

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