तेरह साल के बीच कई जजों और जिम्मेदार अफसरों के बीच लिखा जाता रहा खत पर खत,पर नहीं पड़ा कोई फर्क,सेशन जज पीके जयंत की सख्ती से एक दोषी ने किया आत्मसमर्पण

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2009 में हत्या के दोषियों की सजा की थी बहाल,सेशन कोर्ट को आदेश का अनुपालन कराने की मिली है जिम्मेदारी

अमेठी पुलिस,डीजीपी व प्रमुख सचिव गृह के सारे तंत्र फरार चल रहे दोषियों की गिरफ्तारी कराने में फेल

गौरीगंज थाना क्षेत्र में करीब 40 वर्ष पूर्व हुई थी रामअभिलाख द्विवेदी की हत्या,उसके बेटे पारसनाथ को भी 1994 में जमानत पर रिहा दोषियों ने उतार दिया था मौत के घाट

सुल्तानपुर/दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट से सजा बहाली के तेरह साल बाद फरार चल रहे आजीवन कारावास के दोषी विजयपाल ने कोर्ट की सख्ती पर आत्मसमर्पण कर दिया। दोषी विजयपाल ने अब तक फरार रहने के पीछे आध्यात्मिक उत्थान को लेकर बाहर होने की वजह बताई है। जिसे सेशन जज पीके जयंत ने जेल भेजने का आदेश दिया है। वहीं अब भी फरार चल रहे दोषी चाचा-भतीजे की गिरफ्तारी समेत अन्य कार्यवाहियों को लेकर कोर्ट ने सम्बंधित अधिकारियो को आदेश जारी किया है।
मामला गौरीगंज थाना क्षेत्र स्थित सरैया मानकचंद मजरे कटरा गांव से जुड़ा है। जहां के रहने वाले राम अभिलाख द्विवेदी की दो नवम्बर 1981 की शाम धारदार हथियार व लाठी-डंडो से हमलाकर आरोपियों ने हत्या कर दी थी। मामले में मृतक के पुत्र पारसनाथ द्विवेदी की तहरीर पर गांव निवासी शोभनाथ,विजयपाल,त्रिवेणी प्रसाद,दूधनाथ पुत्रगण रामकुमार व हंसराज पुत्र दूधनाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल हुई। मामले का विचारण जिला न्यायालय सुलतानपुर में चला। जहां पर विचारण पूर्ण होने के पश्चात 16 अगस्त 1984 को सेशन कोर्ट ने सभी आरोपियों को हत्या सहित अन्य धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सेशन कोर्ट के इस फैसले के विरुद्ध दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील की। अपील लम्बित रहने के दौरान दोष सिद्ध सभी अभियुक्त हाईकोर्ट के आदेश पर जमानत पर रिहा हुए। जमानत पर रिहा होने के बाद दूधनाथ मिश्र,विजयपाल व हंसराज ने अपने व अन्य दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर सजा के अंजाम तक पहुँचाने वाले पारसनाथ द्विवेदी की भी दो मई 1994 को हत्या कर दी। जिसके बाद जमानत पर रिहा दोषसिद्ध अभियुक्तो की जमानत निरस्त करने की कार्यवाही हुई तो उनकी जमानत निरस्त हो गई। फिलहाल हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के फैसले को गलत ठहराते हुए उन्हें सात अप्रैल वर्ष 2000 को दोषमुक्त करार दे दिया। हाईकोर्ट के जरिए दोषमुक्त किये जाने संबंधी फैसले को अभियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जिस पर सुनवाई के उपरांत सुप्रीम कोर्ट ने आठ मई 2009 को सेशन कोर्ट के फैसले को जायज ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा बहाल कर दोषियों को दंडित किये जाने का फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में दोष सिद्ध त्रिवेणी प्रसाद व दूधनाथ को जेल भेजने की कार्रवाई की गयी, लेकिन दोष सिद्ध ठहराये जाने के बाद भी शोभनाथ,विजयपाल व हंसराज पुलिस की नजर से भागते रहे। सुप्रीम कोर्ट से हुई सजा बहाली के आदेश का अनुपालन कराकर फरार चल रहे दोषियों को जेल भिजवाने की जिम्मेदारी सेशन कोर्ट को मिली। मृतक रामअभिलाख द्विवेदी के नाती पवन कुमार दूबे ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने को लेकर अर्जी दी है। सजा बहाली का आदेश हुए धीरे-धीरे तेरह साल बीत गये ,पर फरार चल रहे दोषियों ने शीर्ष अदालत से सजा बहाल होने के बाद भी जेल से कभी बाहर न निकल पाने की डर से अब तक कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया। इन तीनो ने कभी भी न तो सरेंडर करना मुनासिब समझा और न ही इन्हें उत्तर प्रदेश की पुलिस कभी पकड़ पाई। तेरह साल के बीच कई सेशन जजों ने प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी समेत अन्य को पत्र भेजा,लेकिन यूपी पुलिस पर कोई फर्क नहीं पड़ा, नतीजतन दोषसिद्ध होने के बाद भी तीनो लोग सजा से बचे रहे। फिलहाल मौजूदा समय मे इस केस की सुनवाई अत्यंत सख्त माने जाने वाले अपर सत्र न्यायाधीश/ सेशन जज एमपी-एमएलए कोर्ट पीके जयंत की अदालत में चल रही है,जिनकी अदालत से फरार चल रहे दोषियों की गिरफ्तारी व कुर्की की कार्यवाही का आदेश जारी करने के साथ-साथ जमानतदारो पर भी शिकंजा कसा गया। इस सख्ती का नतीजा रहा कि तेरह वर्षो से जिन दोषियों को उत्तर प्रदेश की पुलिस व बनी तमाम जांच एजेंसियां पकड़ पाने व उनका कोई सुराग लगा पाने में नाकामयाब रही ,उनमे से दोषी विजयपाल ने गुरुवार को स्वयं कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। इतने वर्षो फरार रहे दोषी विजयपाल ने अब तक अपने को आध्यात्मिक उत्थान को लेकर बाहर रहने का शपथ पत्र दाखिल किया है और उनके अधिवक्ता एसपी मिश्र ने उसके विजयपाल होने की पहचान किया। उधर शासकीय अधिवक्ता संदीप कुमार सिंह ने दोषी विजयपाल को जेल भेजने की मांग की। जिसके पश्चात सेशन जज पीके जयंत के आदेश पर विजयपाल को जेल भेजा गया। फिलहाल अदालत ने कोतवाल गौरीगंज को जिला कारागार जाकर विजयपाल की सही शिनाख्त सम्बन्धी कार्यवाही कर कोर्ट को रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है। वहीं अदालत ने अभी भी फरार चल रहे दोषी शोभनाथ व उसके भतीजे हंसराज की गिरफ्तारी व कुर्की समेत अन्य कार्यवाहियों को लेकर सम्बन्धित अधिकारियों को आदेशित किया है। उम्मीद है कि कोर्ट की सख्ती पर कई वर्षों से छिपकर बैठे दोषी शोभनाथ व हंसराज भी जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे।

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