अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
Published by: उत्पल कांत
Updated Mon, 28 Jun 2021 12:37 PM IST

सार

बसपा की सरकार के दौरान करोड़ों रुपये का स्मारक घोटाला हुआ था। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा दिया गया। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में कुछ और भी गिरफ्तारी की जा सकती है। 

स्मारक घोटाले के मामले में विजिलेंस ने दो को किया गिरफ्तार
– फोटो : फाइल फोटो

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उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बार फिर मायावती सरकार के शासनकाल में हुए स्मारक घोटाले का जिन्न बाहर निकल आया है। मामले की जांच कर रही विजिलेंस लखनऊ ने दो दिन पूर्व मिर्जापुर के अहरौरा थाना क्षेत्र से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी पत्थर खदानों के पट्टेदार हैं। उत्तर प्रदेश में 2007 से 2012 तक बसपा सरकार के दौरान लखनऊ और नोएडा में स्मारकों का निर्माण किया गया था।

स्मारकों में राजस्थान के अलावा मिर्जापुर के अहरौरा के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। अखिलेश सरकार के दौरान 2013 में लोकायुक्त ने जांच रिपोर्ट में करोड़ों में घोटाला होने की बात कही थी।  2013-14 में जांच शुरू हुई। आरोप था कि मिर्जापुर के अहरौरा के गुलाबी पत्थरों का उपयोग लखनऊ में बने स्मारकों में किया गया पर उसकी सप्लाई राजस्थान से दिखाई गई। तभी से घोटाले की जांच चल रही है।

घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस लखनऊ की टीम दो दिन पूर्व जिले में आई। पुलिस अधीक्षक को जानकारी देने के बाद विजिलेंस टीम ने अहरौरा से रमेश यादव और किशोरी लाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बाद स्मारक घोटाले की जांच को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। पुलिस अधीक्षक अजय कुमार सिंह ने बताया कि दो  दिन पूर्व विजिलेंस की टीम आई थी और स्मारक घोटाला मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर ले गई है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बार फिर मायावती सरकार के शासनकाल में हुए स्मारक घोटाले का जिन्न बाहर निकल आया है। मामले की जांच कर रही विजिलेंस लखनऊ ने दो दिन पूर्व मिर्जापुर के अहरौरा थाना क्षेत्र से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी पत्थर खदानों के पट्टेदार हैं। उत्तर प्रदेश में 2007 से 2012 तक बसपा सरकार के दौरान लखनऊ और नोएडा में स्मारकों का निर्माण किया गया था।

स्मारकों में राजस्थान के अलावा मिर्जापुर के अहरौरा के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। अखिलेश सरकार के दौरान 2013 में लोकायुक्त ने जांच रिपोर्ट में करोड़ों में घोटाला होने की बात कही थी।  2013-14 में जांच शुरू हुई। आरोप था कि मिर्जापुर के अहरौरा के गुलाबी पत्थरों का उपयोग लखनऊ में बने स्मारकों में किया गया पर उसकी सप्लाई राजस्थान से दिखाई गई। तभी से घोटाले की जांच चल रही है।

घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस लखनऊ की टीम दो दिन पूर्व जिले में आई। पुलिस अधीक्षक को जानकारी देने के बाद विजिलेंस टीम ने अहरौरा से रमेश यादव और किशोरी लाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बाद स्मारक घोटाले की जांच को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। पुलिस अधीक्षक अजय कुमार सिंह ने बताया कि दो  दिन पूर्व विजिलेंस की टीम आई थी और स्मारक घोटाला मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर ले गई है।



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