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एक निजी अस्पताल में लापरवाही से बच्ची की मौत के आरोप के मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। नए आरोपों के बीच ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर की योग्यता आदि पहलुओं की भी जांच की जाएगी।

बच्ची की आंत में इंफेक्शन तथा पस का रिसाव नहीं रुकने के कारण बच्ची का अस्पताल में दोबारा ऑपरेशन किया गया था। इसके बाद आगे के इलाज के लिए चिल्ड्रेन अस्पतला में भर्ती कराया गया था लेकिन परिजन बच्ची को वहां से भी लेते गए। इस दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने निजी अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

इस मामले में डीएम की ओर से गठित जांच कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई तथ्य सामने आए हैं। इसी क्रम में यह भी जांच की जा रही है कि चिकित्सक के पास बच्चों के ऑपरेशन की योग्यता है या नहीं। इसके अलावा चिल्ड्रेन, एक निजी अस्पताल प्रशासन से भी पूछताछ की जाएगी। एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट जल्द ही सौंपी जाएगी।

बाल संरक्षण आयोग ने मुआवजे के लिए कहा

राष्ट्रीय बाल अधिकार सरंक्षण आयोग मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरी रिपोर्ट पहले ही तलब कर चुका है। आयेाग की ओर से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की बात भी कही गई है। इस बाबत जिला प्रशासन के पास कोई मद तो नहीं है लेकिन इसकी संभावना तलाशी जा रही है। हालांकि, अफसर इस बारे में फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

बाल आयोग से जांच कराने की मांग

लापरवाही से बच्ची की मौत के आरोप को लेकर शुरू विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह ने सर्किट हाउस में राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की सदस्य डॉ.नीता साहू को ज्ञापन सौंपकर जिला प्रशासन की ओर से की जा रही जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने अस्पताल को सीज करने के साथ सेवानिवृत्त जज से मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने इस बाबत ज्ञापन भी सौंपा। पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष अदील हमजा तथा अन्य सपा कार्यकर्ताओं ने भी ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर की योग्यता पर सवाल उठाए। उन्होंने आयोग की ओर से कमेटी गठित कर जांच कराने की मांग की। उन्होंने आयोग की सदस्य को ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन सौंपने वालों में मुबसाशिर हारून, विवेक, ओबाद, सुधीर, उपेंद्र, रवि, मसूद, आनंद आदि शामिल रहे।

एक निजी अस्पताल में लापरवाही से बच्ची की मौत के आरोप के मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। नए आरोपों के बीच ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर की योग्यता आदि पहलुओं की भी जांच की जाएगी।

बच्ची की आंत में इंफेक्शन तथा पस का रिसाव नहीं रुकने के कारण बच्ची का अस्पताल में दोबारा ऑपरेशन किया गया था। इसके बाद आगे के इलाज के लिए चिल्ड्रेन अस्पतला में भर्ती कराया गया था लेकिन परिजन बच्ची को वहां से भी लेते गए। इस दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने निजी अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

इस मामले में डीएम की ओर से गठित जांच कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई तथ्य सामने आए हैं। इसी क्रम में यह भी जांच की जा रही है कि चिकित्सक के पास बच्चों के ऑपरेशन की योग्यता है या नहीं। इसके अलावा चिल्ड्रेन, एक निजी अस्पताल प्रशासन से भी पूछताछ की जाएगी। एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट जल्द ही सौंपी जाएगी।

बाल संरक्षण आयोग ने मुआवजे के लिए कहा

राष्ट्रीय बाल अधिकार सरंक्षण आयोग मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरी रिपोर्ट पहले ही तलब कर चुका है। आयेाग की ओर से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की बात भी कही गई है। इस बाबत जिला प्रशासन के पास कोई मद तो नहीं है लेकिन इसकी संभावना तलाशी जा रही है। हालांकि, अफसर इस बारे में फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

बाल आयोग से जांच कराने की मांग

लापरवाही से बच्ची की मौत के आरोप को लेकर शुरू विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह ने सर्किट हाउस में राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की सदस्य डॉ.नीता साहू को ज्ञापन सौंपकर जिला प्रशासन की ओर से की जा रही जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने अस्पताल को सीज करने के साथ सेवानिवृत्त जज से मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने इस बाबत ज्ञापन भी सौंपा। पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष अदील हमजा तथा अन्य सपा कार्यकर्ताओं ने भी ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर की योग्यता पर सवाल उठाए। उन्होंने आयोग की ओर से कमेटी गठित कर जांच कराने की मांग की। उन्होंने आयोग की सदस्य को ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन सौंपने वालों में मुबसाशिर हारून, विवेक, ओबाद, सुधीर, उपेंद्र, रवि, मसूद, आनंद आदि शामिल रहे।



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