नई दिल्ली. एक संसदीय समिति (Parliamentary Committee) ने मंगलवार को सरकार से कहा कि वह सीबीआई (CBI) के अधिकार क्षेत्र को सुस्पष्ट करने और उसे अधिक शक्ति प्रदान करने के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन करने अथवा नया कानून लाने की आवश्यकता का आकलन करने के बारे में सोचे. केंद्रीय जांच ब्यूरो ने पैनल को बताया कि उसकी जांच उन राज्यों द्वारा ‘सामान्य सहमति’ की वापसी से बाधित होती है, जो राज्य मुख्य रूप से विपक्षी दलों द्वारा शासित होते है.

समिति ने मंगलवार को संसद में पेश की रिपोर्ट में कहा है कि “सीबीआई ने समिति को अपनी चिंता से अवगत कराया है कि वह संबंधित राज्यों की आम सहमति के अभाव में नए मामलों की जांच करने में असमर्थ है, जो विशेष रूप से, बैंक धोखाधड़ी/आर्थिक अपराधों और भ्रष्टाचार के मामलों से संबंधित हैं और जिसमें केंद्र सरकार के कर्मचारी शामिल हैं. जहाँ जनता के धन के दुरुपयोग या मुख्य रूप से आपराधिक कदाचार के मामले में केंद्र सरकार या केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारियों की संलिप्तता के आरोप हैं.

रिपोर्ट में कही गई ये बात
कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की अनुदान मांगों (वर्ष 2021-22) पर अपनी 106 वीं रिपोर्ट में कहा कि यह समिति सीबीआई के विचार से सहमत है कि राज्यों द्वारा आम सहमति को वापस लेने पर जांच बाधित होती है.ये भी पढ़ें- बंगाल बीजेपी में टिकट बंटवारे पर रार, पार्टी ने नेताओं को तत्काल दिल्ली बुलाया

इसने कहा, ‘‘इसलिए, समिति, सरकार से यह आकलन करने की सिफारिश करती है कि क्या मौजूदा कानूनों में संशोधन करने या सीबीआई के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने और इसे अधिक शक्ति प्रदान करने के लिए एक नया कानून लाने की आवश्यकता है.’’

आठ राज्यों – मिजोरम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल, झारखंड और पंजाब ने दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (डीएसपीई) अधिनियम, 1946 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सीबीआई से सामान्य सहमति वापस ले ली है.

सीबीआई को कैडर पुर्नगठन की जरूरत

डीएसपीई अधिनियम 1946 की धारा 6 के अनुसार, सीबीआई को राज्य सरकार से राज्य के किसी भी क्षेत्र में अपनी शक्तियों और अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने के लिए सहमति की आवश्यकता है.

बीजेपी सांसद भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने भी कहा कि सीबीआई को कैडर पुनर्गठन की गंभीर जरूरत है और सरकार से सिफारिश की गई है कि इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए.

31 जनवरी, 2021 तक 7,273 की स्वीकृत पदों के मुकाबले सीबीआई में 1,377 पद खाली थे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि सीबीआई ने समिति को सूचित किया है कि ब्यूरो के ‘प्रतिनियुक्तिवादी चरित्र’ के कारण हमेशा कुछ रिक्तियां होंगी.

(Disclaimer: यह खबर सीधे सिंडीकेट फीड से पब्लिश हुई है. इसे News18Hindi टीम ने संपादित नहीं किया है.)

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