सेमीनार में हिस्सा लेते वैज्ञानिक और अन्य।

सेमीनार में हिस्सा लेते वैज्ञानिक और अन्य।
– फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें

पशु पोषण विभाग ने किया शताब्दी स्मृति पट्टिका, कंपेडियम का विमोचन

बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के पशु पोषण विभाग ने सौ साल पूरे होने पर बृहस्पतिवार को शताब्दी संगोष्ठी की। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने पशुओं का उत्पादन बढ़ाने के लिए उनके पोषण पर जोर दिया। इससे पहले शताब्दी स्मृति पट्टिका, शताब्दी कंपेडियमका विमोचन और पशु पोषण पर बनी लघु फिल्म रिलीज की गई।
मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सचिव, महानिदेशक कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने संस्थान निदेशक और पशु पोषण से जुड़े वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं देकर कार्यक्रम की शुरुआत की। कहा, पशु पोषण विभाग के सभी वैज्ञानिकों ने उत्पादन बढ़ाकर देश की अर्थव्यवस्था में सुधारने में योगदान दिया है। उनके द्वारा पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता बढ़ाने के लिए निर्धारित मानक से गुणवत्ता सुधरी है। सूखे चारे की समस्या, पोषण युक्त चारे की उपलब्धता, हरा चारे की उपज आदि क्षेत्रों में विभाग का योगदान रहा है। परिषद के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. बीएन त्रिपाठी ने कहा कि पोषण पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन और उत्पादन के लिए जरूरी है। इसी से दूध और गुणवत्ता युक्त मांस समेत पशु उत्पादन में वृद्धि होती है। संस्थान निदेशक डॉ. बीपी मिश्र ने पशु पोषण शोध, पशुओं की पोषक आवश्यकता और पशु उत्पादन की जानकारी दी।

चुनौतियों का सामना करने के तैयारी रखें

विशिष्ट अतिथि पूर्व सलाहकार खाद्य, कृषि संगठन एवं आईवीआरआई के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. एसके रंजन ने भी पशुओं की पोषण क्षमता बढ़ाने के लिए विकल्प सुझाए। राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के पूर्व कुलपति डॉ. खगेश्वर प्रधान ने वैज्ञानिकों को भविष्य की चुनौतियों के लिए नए शोध करने की सलाह दी। पशु पोषण संघ के महासचिव डॉ. अनिल गर्ग ने पशु पोषण के क्षेत्र में पुरस्कारों की घोषणा की। यहां पशु पोषण संघ के अध्यक्ष एवं पशु पोषण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एके वर्मा, आयोजन सचिव डॉ. एके पटनायक, डॉ. नारायण दत्ता, डॉ. एनएन पाठक, डॉ. डीके अग्रवाल, डॉ. उषा रानी मेहरा आदि मौजूद रहीं।

पशु पोषण विभाग ने किया शताब्दी स्मृति पट्टिका, कंपेडियम का विमोचन

बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के पशु पोषण विभाग ने सौ साल पूरे होने पर बृहस्पतिवार को शताब्दी संगोष्ठी की। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने पशुओं का उत्पादन बढ़ाने के लिए उनके पोषण पर जोर दिया। इससे पहले शताब्दी स्मृति पट्टिका, शताब्दी कंपेडियमका विमोचन और पशु पोषण पर बनी लघु फिल्म रिलीज की गई।

मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सचिव, महानिदेशक कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने संस्थान निदेशक और पशु पोषण से जुड़े वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं देकर कार्यक्रम की शुरुआत की। कहा, पशु पोषण विभाग के सभी वैज्ञानिकों ने उत्पादन बढ़ाकर देश की अर्थव्यवस्था में सुधारने में योगदान दिया है। उनके द्वारा पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता बढ़ाने के लिए निर्धारित मानक से गुणवत्ता सुधरी है। सूखे चारे की समस्या, पोषण युक्त चारे की उपलब्धता, हरा चारे की उपज आदि क्षेत्रों में विभाग का योगदान रहा है। परिषद के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. बीएन त्रिपाठी ने कहा कि पोषण पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन और उत्पादन के लिए जरूरी है। इसी से दूध और गुणवत्ता युक्त मांस समेत पशु उत्पादन में वृद्धि होती है। संस्थान निदेशक डॉ. बीपी मिश्र ने पशु पोषण शोध, पशुओं की पोषक आवश्यकता और पशु उत्पादन की जानकारी दी।

चुनौतियों का सामना करने के तैयारी रखें

विशिष्ट अतिथि पूर्व सलाहकार खाद्य, कृषि संगठन एवं आईवीआरआई के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. एसके रंजन ने भी पशुओं की पोषण क्षमता बढ़ाने के लिए विकल्प सुझाए। राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के पूर्व कुलपति डॉ. खगेश्वर प्रधान ने वैज्ञानिकों को भविष्य की चुनौतियों के लिए नए शोध करने की सलाह दी। पशु पोषण संघ के महासचिव डॉ. अनिल गर्ग ने पशु पोषण के क्षेत्र में पुरस्कारों की घोषणा की। यहां पशु पोषण संघ के अध्यक्ष एवं पशु पोषण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एके वर्मा, आयोजन सचिव डॉ. एके पटनायक, डॉ. नारायण दत्ता, डॉ. एनएन पाठक, डॉ. डीके अग्रवाल, डॉ. उषा रानी मेहरा आदि मौजूद रहीं।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here