सवालों के घेरे में जेल प्रशासन

सवालों के घेरे में जेल प्रशासन

Chitrakoot Jail Gang war: सबसे पहले गैंगवार के समय ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों (Policeman) से पूछताछ की गई. उसके बाद जब हाई सिक्योरिटी सेल की सुरक्षा-व्यवस्था को चेक किया गया तो CCTV कैमरों के खराब होने की जानकारी आई सामने.

लखनऊ/चित्रकूट. उत्तर प्रदेश की चित्रकूट जिला जेल में गैंगवार (Chitrakoot Jail Gang war) की जांच जारी है. इस बीच सूत्रों के अनुसार जांच में चित्रकूट जेल के कई सीसीटीवी खराब मिले हैं. सीसीटीवी दुरूस्त करने के लिए कार्यदायी संस्था को पत्र लिखा गया है. यूपी की सभी जेलों के सीसीटीवी कैमरे परखने के निर्देश जारी हो गए हैं. उधर, डीएम और एसपी बांदा जेल का मुआयना करने पहुंचे. बता दें कि बांदा जेल में माफिया मुख़्तार अंसारी बंद है. रिपोर्ट के मुताबिक जिस हाई सिक्योरिटी सेल में अंशु दीक्षित को रखा गया था, वहां के सीसीटीवी पिछले दो महीने से बंद थे. मामले की जांच कमेटी में तीन अधिकारी शामिल है. जो कि चित्रकूट के कमिश्नर डीके सिंह, आईजी सत्यानारायण और डीआईजी संजीव त्रिपाठी हैं. सबसे पहले गैंगवार के समय ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों से पूछताछ की गई. उसके बाद जब हाई सिक्योरिटी सेल की सुरक्षा-व्यवस्था को चेक किया गया तो पता चला कि वहां का कोई कैमरा काम ही नहीं कर रहा है. जिसके बाद पूरा मामला साफ हो गया. बताया जा रहा था कि शिकायतों के बाद भी जेल के कैमरों को सही नहीं कराया गया था. पूछताछ में पता चला कि दो महीने पहले सभी कैमरे एक साथ खराब हो गए थे. इसके मेंटीनेंस की जिम्मेदारी कैमरे लगाने वाली एजेंसी की है. सवाल ये है कि शिकायतों के बाद भी कैमरे सही क्यों नहीं हुए. वहीं जेल प्रशासन ने इस पर लापरवाही क्यों की. वहीं संबंधित एजेंसी पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया. ये है पूरा मामलाबता दें शुक्रवार सुबह जेल में कैद अंशु दीक्षित ने पिस्टल से यहां बंद मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अली और मुकीम उर्फ काला पर गोली चला दी. हमले में दोनों की मौत हो गई. मुकीम काला पश्चिम यूपी का बड़ा बदमाश था. वहीं जवाबी कार्रवाई में अंशु दीक्षित को पुलिस ने मार गिराया. मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है. जेलर और जेल अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया है.









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