ग्वालियर. ​​​​​डोपिंग में फंसी देश की महिला क्रिकेटर अंशुला राव (Anshula rao) का ग्वालियर से गहरा नाता रहा है. डोपिंग टेस्ट में पॉजिटिव निकली देश की पहली महिला क्रिकेटर अंशुला राव ने ग्वालियर के ही LNIPE से फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई की थी. यहीं अंशुला ने क्रिकेट की ABCD भी सीखी. बेहतरीन क्रिकेट के दम पर अंशुला ग्वालियर डिवीजन से लेकर MP की टीम में खेलीं और फिर भारतीय महिला टीम में भी शामिल हुई थीं. हालांकि बिना इजाजत मैच खेलने के कारण उन्हें LNIPE से हटा दिया गया था.

मध्य प्रदेश महिला क्रिकेट टीम की बेहतरीन खिलाड़ी रहीं अंशुला राव डोपिंग टेस्ट में पॉजिटिव निकली हैं. इस वजह से चार साल तक उनके क्रिकेट खेलने पर पाबंदी लगा दी गयी है. लेकिन इससे भी शर्मसार करने वाली बात ये है कि अंशुला देश की पहली महिला क्रिकेटर हैं, जिसपर डोपिंग की वजह से प्रतिबंध लगाया है.

दोनों सैंपल में पुष्टि

सोमवार को नेशनल डोपिंग एजेंसी के डिसिप्लिनरी पैनल ने अंशुला को प्रतिबंधित दवाओं एनाबॉलिक स्टेरॉयड ’19- नॉरएंड्रोस्टेरोन के सेवन का भी दोषी पाया. उनके 2 सैम्पल हुए थे. दोनों ही सैंपल में प्रतिबंधित दवाई मिली है. डोपिंग में पॉजिटिव आने के कारण अब अंशुला को एक सैंपल टेस्ट का 2 लाख का भुगतान खुद करना पड़ेगा. पिछले साल 14 मार्च को बड़ौदा टूर्नामेंट खेलने के दौरान अंशुला का डोपिंग टेस्ट के लिए सैम्पल लिया गया था. जांच के लिए अंशुला के सैम्पल बेल्जियम की लेबोरेटरी में भेजे गए. उसी टेस्ट रिपोर्ट में प्रतिबंधित दवा के नमूने मिले हैं.

अंशुला का बेहतरीन सफर

अंशुला राव मूलतः उत्तर प्रदेश के बनारस शहर की रहने वाली हैं. साल 2014 में उन्होंने बनारस से ग्वालियर का रुख किया. ग्वालियर में लक्ष्मीबाई फिजिकल यूनिवर्सिटी ( LNIPE) में BPed (बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) में दाखिला लिया था. चार साल की इस पढ़ाई के साथ साथ अंशुला ने क्रिकेट में भी हाथ आजमाए. वो धीरे धीरे बेहतरीन ऑल राउंडर बन गई. साल 2015 में अंशुला की ग्वालियर डिवीजन महिला क्रिकेट टीम में एंट्री हुई, जोरदार बल्लेबाज़ी के दम पर उनका 2015- 16 की मध्य प्रदेश की अंडर-19 टीम के लिए चयन हुआ. इसके बाद अंशुला ने पीछे मुड़कर नहीं देखा लगातार MP की टीम के लिए खेलती रहीं.

क्रिकेट के लिए जुनूनी अंशुला की पढ़ाई अधूरी छूटी…
ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट में महिला टीम की देखरेख करने वाले अशोक तायल का कहना है अंशुला गजब की जुनूनी क्रिकेटर है. घंटों तक प्रैक्टिस करना उसका जुनून था. बेहतरीन बल्लेबाज़ होने के साथ ही गेंदबाजी में भी उसकी जबरदस्त पकड़ है. अंशुला बनारस की रहने वाली हैं, लेकिन ग्वालियर में पढ़ाई करने के कारण BCCI के नियमों के तहत उसे ग्वालियर डिवीजन और MP की टीम में चुना गया था. अंशुला अपने BPED डिग्री कोर्स के चौथे और अंतिम साल में LNIPE की इजाज़त के बिना टूर्नामेंट खेलने गई थी. इस अनुशासनहीनता के लिए उसे यूनिवर्सिटी से टर्मिनेट कर दिया गया था.



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