कोरोना की तीसरी लहर का बच्चों पर खतरा

कोरोना की तीसरी लहर का बच्चों पर खतरा

Covid-19 Guidelines for Kids: आयुष मंत्रालय ने बच्चों की देखभाल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है. आईए एक नज़र डालते हैं इन गाइडलाइन पर…

नई दिल्ली. देश भर में कोरोना (Coronavirus) की रफ्तार अब थोड़ी थमती दिख रही है. लगातार कोरोना संक्रमित मरीज़ों की संख्या में कमी देखी जा रही है. लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. कहा जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को चपेट में ले सकती है. इसकी सबसे बड़ी वजह है छोटे बच्चों के लिए फिलहाल कोई वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) का न होना. दुनिया में फिलहाल एकमात्र फाइजर की वैक्सीन है जो 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को लगाई जा रही है. लेकिन छोटे बच्चों के लिए अभी दुनियाभर में वैक्सीन के ट्रायल ही चल रहे हैं. ऐसे में बच्चों पर खास ध्यान रखने की जरूरत है.

वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों की इम्यूनिटी काफी अच्छी होती है. लेकिन इसके बावजूद कोरोना वायरस के आक्रमण का खतरा बना रहता है. लिहाजा आयुष मंत्रालय ने बच्चों की देखभाल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है. आईए एक नज़र डालते हैं इन गाइडलाइन पर…

गाइडलाइन में बच्चों को अपने घर से बाहर अक्सर हाथ धोने और मास्क पहनने पर जोर दिया गया है. अगर बच्चा स्वेच्छा से हाथ नहीं धोता है तो माता-पिता को एक छोटा सा इनाम देना चाहिए.

5-18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए फेस मास्क अनिवार्य है. जबकि 2-5 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए, माता-पिता की देखरेख में मास्क पहनना चाहिए. बच्चों के लिए नॉन-मेडिकल या फैब्रिक थ्री-लेयर कॉटन मास्क बेहतर हैं.

लक्षण वाले या कोविड संदिग्ध वाले बच्चों को दादा-दादी के संपर्क में नहीं आना चाहिए क्योंकि बुजुर्गों में गंभीर बीमारी का खतरा बहुत अधिक होता है.

माता-पिता को इन चीज़ों की निगरानी करनी चाहिए – चार-पांच दिनों से अधिक समय तक बुखार, खाने पीने में कमी, बच्चे का सुस्त हो जाना, सांस लेने की रफ्तर में तेज़ी और ऑक्सीजन लेवल का 95% से कम होना.

बच्चों को पीने के लिए गुनगुना पानी दिया जाना चाहिए. दो साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए सुबह और रात में उचित ब्रश करके स्वच्छता सुनिश्चित करना चाहिए, 5 साल से अधिक उम्र के बच्चों के को गर्म पानी से गरारे करना चाहिए.

तेल मालिश, नाक में तेल लगाना और योगाभ्यास जैसे प्राणायाम और ध्यान. 5 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों की क्षमता के अनुसार दूसरे व्यायाम को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.

बच्चों को हल्दी दूध, चवनप्राश और पारंपरिक जड़ी बूटियों (आयुष बाल क्वाथ) का काढ़ दें.

बच्चों को भी पर्याप्त नींद और आसानी से पचने योग्य, ताजा और गर्म और संतुलित आहार लेना चाहिए.

बच्चों के खेलने की जगह, खाट, बिस्तर, कपड़े और खिलौनों पर हर शाम धूमन होना चाहिए.

बच्चों को घर पर रहना चाहिए. बाहर यात्रा करने से बचना चाहिए, और उन्हें वीडियो और फोन कॉल के माध्यम से दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ जुड़े रहने में मदद करनी चाहिए.





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