चक्रवात यास के नुकसान से बचने के लिए हो चुकी है तैयारी.

चक्रवात यास के नुकसान से बचने के लिए हो चुकी है तैयारी.

चक्रवाती तूफान यास को लेकर मौसम विभाग के अलर्ट के मुताबिक उत्तरी ओडिशा और पश्चिम बंगाल के समुद्र तट पर ये तूफान काफी नुकसान कर सकता है. ऐसे में सरकार ने समय रहते पोर्ट ट्र्स्ट से तूफान से निपटने की तैयारी के निर्देश दिए हैं. ऐसे में दोनों ट्रस्ट युद्धस्तर पर तैयारी में जुटे हुए हैं, ताकि तूफान में कम से कम जान-माल का नुकसान हो.

नई दिल्ली. पश्चिमी तट पर तूफान टाउते के प्रकोप के बाद अब पूर्वी तट पर यास (Cyclone Yaas) नाम के चक्रवात की बारी है. ऐसे में अथॉरिटीज़ अलर्ट पर हैं ताकि इससे कम से कम नुकसान हो सके. इस बार ओडिशा के उत्तरी समुद्री तट और बंगाल की सीमा पर यास चक्रवात से तूफान में बदलने की आशंका है. मौसम विभाग का अनुमान है कि ये 26 मई को तेजी से बंगाल और ओडिशा के तटों से गुजरेगा. इस दौरान तूफानी हवाएं 155-165 किमी प्रति घंटे के हिसाब से चल सकती हैं. हवाओं के साथ भारी बारिश के भी आसार हैं. कुदरत के इस रौद्र रूप में जाहिर सी बात है, जन जीवन अस्त व्यस्त होगा ही लेकिन मुंबई से गुजरात के बंदरगाहों पर टाउते से हुए नुकसान से सबक लेकर मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स ने अपने पूर्वी तट के बंदरगाहों को पहले से ही सतर्क कर दिया है और ये सुनिश्चत करने में लगी है कि जान-माल का नुकसान कम हो. पीएम ने भी चक्रवात से निपटने के लिए तमाम मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ बैठक की है और राहत-बचाव के काम का जायजा लिया है. जहाजरानी मंत्री मनसुख भाई मंडाविया ने पूर्वी तट के दो अहम पोर्ट – पारादीप पोर्ट ट्रस्ट और श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट ट्रस्ट से लगातार संपर्क में हैं.

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तूफान यास से निबटने के लिए ओडिशा का पारादीप पोर्ट ट्रस्ट तैयारभारी बारिश और तूफान से बचने के लिए ओडिशा के पारादीप पोर्ट ट्रस्ट ने पूरे इलाके में सभी नालों की युद्धस्तर पर सफाई कराई है ताकि पानी जमे नहीं. ट्रस्ट की 4 टीमें उपकरणों के साथ तूफान के दौरान भी सड़कों की सफाई में लगी रहेंगी. सावधानी बरतते हुए अब 23 मई की रात 10 बजे से पोर्ट की तरफ आने वाले किसी भी जहाज को इजाजत नहीं दी जा रही. पोर्ट से शिप को बाहर ले जाने की अनुमति भी 24 मई को 12 बजे दोपहर तक ही थी. 25 मई की सुबह तक सभी ऑपरेशन रोक दिए जाएंगे और सभी कर्मचारियों को वहां से हटा लिया जाएगा. पारादीप पोर्ट में एंकर डाले जहाजों को कहा गया है कि वो समुद्र में दूर निकल जाएं. कोस्ट गार्ड के सभी जहाज और डीसीआई के ड्रेजर को पोर्ट से निकल कर समुद्र में जाने को कह दिया गया है. निर्माण के काम में लगी मशीनों और उपकरणों को सुरक्षित कर लिया गया है. 24 मई की सुबह से पोर्ट के गेट नंबर 4 पर एक 24 घंटे का कंट्रोल रूम खोल दिया गया है. ये तब तक काम करता रहेगा जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए. यहां 5 साइक्लोन सेंटर्स बनाए गए हैं, जहां स्थानीय स्लमों और डूबने वाले इलाकों के लगभग 2000 लोगों को सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए रखा जाएगा. इन सेंटर्स में 24 घंटे बिजली उपलब्ध रखने की भी व्यवस्था है. पोर्ट ट्रस्ट इस बात के लिए तैयार है कि आपदा में किसी भी शख्स की जान न जाने पाए. ये भी पढ़ें- राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 3 दिन में मिलेगी 48 लाख कोरोना वैक्सीन की खेप : केंद्र  कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट ने भी की तूफान यास से निबटने की तैयारी
पहले आए तूफान अंफान से सबक लेते हुए एक बार एसपीएम पोर्ट ट्रस्ट ने तैयारी की है कि किसी की भी जान नहीं जाए और किसी भी जहाज या संपत्ति का नुकसान न हो. कोलकाता डॉक सिस्टम और हल्दिया डॉक कंप्लेक्स में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में 21 मई से ही एक कंट्रोल रूम ने काम करना शुरू कर दिया है. तूफान आने से पहले सभी पोर्ट वेसल्स को डॉक के अंदर ले लिया जाएगा. एंकर डाल कर कोई भी जहाज न तो जेट्टी में और ना ही एंकरेज में रहेगा. डॉक के अंदर भी जहाजों को बेस्ट प्रैक्टिस के तहत बांधा जा रहा है. सभी सर्वे लॉन्चेज को पास की नदी में रखा जाएगा ताकि इमरजेंसी में इसका इस्तेमाल हो सके. सभी क्रेन, इलेक्ट्रिक और मैकेनिकल मशीनों, पोर्ट की फायर सर्विस, पोर्ट की गोताखोर यूनिट को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है. हर महत्वपूर्ण स्थान पर फ्रंट लाइन वर्कर्स की तैनाती की गयी है. हर स्ट्रैटजिक लोकेशन पर जेनरेटर सेट और कर्मचारियों को वायरलेस सेट दिया गया है. महत्वपूर्ण लोगों के लिए सेफ हाउस भी बने हैं. सीआईएसएफ के जवान भी पोर्ट के इलाके की लगातार पेट्रोलिंग में लगे रहेंगे ताकि कंट्रोल रूम में तुरंत सूचना भेजी जा सके.





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