[ad_1]

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

Updated Wed, 23 Sep 2020 12:59 PM IST

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर


कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने हथियार के वार से कटी खाने की नली और क्षतिग्रस्त सांस की नली को जोड़कर घायल की जान बचा ली। अब वह पूरी तरह से ठीक है और खाना भी खा रहा है। बलरामपुर जिले के रतोही गांव निवासी रिंकू तिवारी (19) को अज्ञात युवकों ने धारदार हथियार से गर्दन पर वार कर दिया था।

उसे 10 सितंबर को जिला अस्पताल से केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर लाया गया। यहां जांच में पता चला कि खाने की नली कट गई है और सांस नली क्षतिग्रस्त हो गई है। ऐसे में मरीज का ऑक्सीजन लेवल बेहद कम हो गया था। इलाज से पहले पहले कोरोना जांच का वक्त नहीं था, लिहाजा डॉक्टरों ने खुद को संक्रमण से बचाने की फिक्र छोड़ अपनी जान जोखिम डालते हुए इलाज की प्रक्रिया शुरू की। 

ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. यादवेंद्र धीर ने मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए ट्रैक एस्ट्रोनॉमी किया। इस प्रक्रिया में सांस की नली में सीटी लगाकर मरीज को ऑक्सीजन दी जाती है। इसके बाद ट्रॉमा सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संदीप तिवारी व डॉ. समीर मिश्र, डॉ. यादवेंद्र धीर व डॉ. हर्षित अग्रवाल ने कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सर्जरी की। करीब 30 मिनट तक चली सर्जरी के दौरान पहले दोनों नली जोड़ी गई और फिर खून की नलिकाओं को जोड़ा गया। 

कई बार बिगड़ी हालत, पांच यूनिट चढ़ा खून

डॉ. समीर मिश्रा ने बताया कि मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। सर्जरी के दौरान कई बार उसकी हालत बिगड़ी, लेकिन जीवनरक्षक दवाएं और करीब पांच यूनिट खून चढ़ाकर उसकी जिंदगी बचाने में सफलता मिली। विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप तिवारी के मुताबिक, क्षतिग्रस्त मांसपेशियां एवं खून की धमनियों को दुरुस्त करना भी चुनौतीपूर्ण था। टीम की कोशिश रंग लाई और मरीज अब पूरी तरह ठीक है। वह घर जाने के लिए तैयार है।

केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने हथियार के वार से कटी खाने की नली और क्षतिग्रस्त सांस की नली को जोड़कर घायल की जान बचा ली। अब वह पूरी तरह से ठीक है और खाना भी खा रहा है। बलरामपुर जिले के रतोही गांव निवासी रिंकू तिवारी (19) को अज्ञात युवकों ने धारदार हथियार से गर्दन पर वार कर दिया था।

उसे 10 सितंबर को जिला अस्पताल से केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर लाया गया। यहां जांच में पता चला कि खाने की नली कट गई है और सांस नली क्षतिग्रस्त हो गई है। ऐसे में मरीज का ऑक्सीजन लेवल बेहद कम हो गया था। इलाज से पहले पहले कोरोना जांच का वक्त नहीं था, लिहाजा डॉक्टरों ने खुद को संक्रमण से बचाने की फिक्र छोड़ अपनी जान जोखिम डालते हुए इलाज की प्रक्रिया शुरू की। 


आगे पढ़ें

सांस नली में सीटी लगा ऑक्सीजन दी

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here