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लखनऊ2 घंटे पहले

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दिनेश प्रताप सिंह, एमएलसी - Dainik Bhaskar

दिनेश प्रताप सिंह, एमएलसी

  • कांग्रेस कार्यकर्ता ने विधान परिषद के सभापति के समक्ष दाखिल की थी याचिका

कांग्रेस कार्यकर्ता द्वारा रायबरेली क्षेत्र से एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह की दलबदल कानून के तहत सदस्यता समाप्त किए जाने की याचिका पर विधान परिषद के कार्यकारी सभापति ने फैसला दिया है। कार्यकारी सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कांग्रेस के एमएलसी रहे दिनेश प्रताप सिंह को भाजपा पार्टी में विलय किए जाने पर अंतिम निर्णय दिया है।

रायबरेली के स्थानीय निकाय विधान परिषद क्षेत्र से मार्च 2016 से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में दिनेश प्रताप सिंह एमएलसी चुने गए थे। वहीं इस मामले पर कांग्रेस के एमएलसी दीपक सिंह ने कहा कि, पार्टी हाई कोर्ट में सभापति के फैसले को चुनौती देगी।

सभापति ने कांग्रेस के केवल दो एमएलसी होने पर दल बदल कानून नहीं लागू होने की कही बात

विधान परिषद सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने याचिकाकर्ता के एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह की सदस्यता रद्द अयोग्य घोषित किए जाने पर फैसला सुनाया है। सभापति ने दिए गए आदेश में लिखा कि, याचिकाकर्ता देवांश तिवारी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के द्वारा दल परिवर्तन के आधार पर नियमावली 1987 के अंतर्गत का हवाला दिया गया था।

लेकिन याचिकाकर्ता और एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह के दोनों पक्षों को सुनने के बाद या स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस से दीपक सिंह सदस्य व दिनेश प्रताप सिंह ही विधान परिषद सदस्य हैं। ऐसे में दिनेश प्रताप सिंह के द्वारा स्वेच्छा से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की गई है। इसलिए दलबदल कानून इस पर लागू नहीं होता है। दो एमएलसी में एक आने से 50 प्रतिशत के आने से सदस्यता समाप्त नहीं की जा सकती हैं।

4 अगस्त 2020 को कांग्रेस कार्यकर्ता ने दाखिल की थी याचिका

कांग्रेस कार्यकर्ता देवांश तिवारी ने 4 अगस्त 2020 को एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह की सदस्यता रद्द किए जाने किए जाने के लिए सभापति विधान परिषद के समक्ष याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ता के द्वारा यह तर्क दिया गया कि दिनेश प्रताप सिंह ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है।

21 अप्रैल 2018 को भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में दिनेश प्रताप सिंह द्वारा सदस्यता ली थी। इस आधार पर दिनेश प्रताप सिंह के ऊपर दल बदल कानून के तहत विधान परिषद की सदस्यता रद्द की जाए।

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