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मुंबई42 मिनट पहले

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कोरोना महामारी के बीच भारत में गोल्ड की डिमांड तेजी से घट सकती है। सख्त पाबंदियों और फिजिकल मार्केट बंद होने से डिमांड पर बुरा असर पड़ा है। वर्ल्‍ड गोल्‍ड काउंसिल (WGC) के मुताबिक 2021 में जनवरी-मार्च के दौरान 140 टन की मांग रही, जो सालभर पहले से 37% ज्यादा है। लेकिन यह पॉजिटिव ग्रोथ बने रहने की संभावना कम ही है।

पहली तिमाही में क्यों घटी डिमांड?
काउंसिल के मुताबिक पहली तिमाही में डिमांड बढ़ने की वजह लॉकडाउन से जुड़ी पाबंदियों में राहत मिलना और दाम घटना रहा। 2020 की पहली तिमाही में सोने की मांग 102 टन रही थी। इसी दौरान गोल्ड ज्वैलरी की टोटल डिमांड 39% बढ़कर 102.5 टन पर पहुंच गई, जो एक साल पहले 73.9 टन रही थी।

डिमांड में गिरावट की आशंका
कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट मनोज कुमार जैन के मुताबिक कोरोना के कारण सख्त पाबंदियों के चलते गोल्ड की डिमांड दूसरी तिमाही में कमजोर रहेगी। हालांकि, दिवाली के चलते तीसरी तिमाही में डिमांड सुधरने की संभावना है। सोमवार को वायदा बाजार में सोना 178 रुपए महंगा होकर 47,929 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।

जून के आखिर में 50 हजार रुपए तक पहुंचेगा सोने का भाव
उन्होंने बताया कि निवेशकों के लिए अभी भी गोल्ड में निवेश करना चाहिए। इसके 47,000- 48,000 की रेंज में निवेश की सलाह होगी। क्योंकि जून आखिर तक MCX पर गोल्ड का भाव 50 हजार की रेंज को पार कर सकता है। खास बात यह है कि निवेशकों को शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों के लिए अच्छे रिटर्न की संभावना है। दरअसल, ग्लोबल महंगाई बढ़ने का फायदा गोल्ड और सिल्वर को मिलता है। इसके अलावा अमेरिकी डेफिसिट बढ़ने से डॉलर कमजोर होगा, जिससे गोल्ड को फायदा मिलेगा।

दुनिया को मंदी से उबारने में मददगार होगा भारत
अमेरिकी एजेंसी CIA के पहले वित्तीय जासूस के रूप में मशहूर अर्थशास्त्री और बेस्ट सेलर किताब ‘द न्यू ग्रेट डिप्रेशन’ के लेखक जिम रिकर्ड्स भी मानते हैं कि भारत लोग सोने के शौकीन हैं जो कि मंदी में उपयोगी साबित होगा। यही कारण है कि भारत दुनिया को मंदी से उबारने में मदद करेगा, क्योंकि बढ़ती जनसंख्या के कारण आर्थिक विकास यहां औरों की तुलना में तेज होगा।

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