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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 12 Dec 2020 12:36 AM IST

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लॉकडाउन के दौरान निचली अदालतों की ओर से आरोपियों के रिमांड आदेश पारित न करने के मामले पर सख्त संज्ञान लिया है।

न्यायमूर्ति एआर मसूदी ने गृह व कारागार विभाग के प्रमुख सचिवों को 3 और 10 दिसंबर के आदेश भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 25 मार्च से 16 जून तक रिमांड आदेश न पारित करने वाले लखनऊ और हरदोई के मजिस्ट्रेटों व सत्र न्यायाधीशों का ब्योरा भी तलब किया है। इसके लिए कोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार को लखनऊ के जिला जज की 29 सितंबर की रिपोर्ट को देखते हुए दोनों जिलों से ब्योरा लेने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी।

कोर्ट ने 10 दिसंबर को लखनऊ बेंच के वरिष्ठ निबंधक और यूपी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य, सचिव को संबंधित जिलों के पूरे विवरण के साथ पेश होने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति एआर मसूदी ने 3 दिसंबर को यह आदेश अभिषेक श्रीवास्तव और संजीव यादव की जमानत अर्जियों पर सुनवाई के बाद जमानत मंजूर करते हुए दिया था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह आश्चर्यजनक है कि जिला व सत्र न्यायाधीशों या मजिस्ट्रेटों द्वारा जमानत व रिमांड के मामलों में पूरी प्रक्रिया को गलत तरीके से समझा गया।

जबकि गत 25 मार्च का हाईकोर्ट का आदेश काफी स्पष्ट था। फिर भी नियम या पहले के सर्कुलर के तहत कार्यवाही नहीं की गई, जिसमें छुट्टियों के दौरान की प्रक्रिया वर्णित थी। कोर्ट ने रिमांड की अवधि बढ़ाए बगैर आरोपियों को जेल में रखने पर सख्त रुख अख्तियार किया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लॉकडाउन के दौरान निचली अदालतों की ओर से आरोपियों के रिमांड आदेश पारित न करने के मामले पर सख्त संज्ञान लिया है।

न्यायमूर्ति एआर मसूदी ने गृह व कारागार विभाग के प्रमुख सचिवों को 3 और 10 दिसंबर के आदेश भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 25 मार्च से 16 जून तक रिमांड आदेश न पारित करने वाले लखनऊ और हरदोई के मजिस्ट्रेटों व सत्र न्यायाधीशों का ब्योरा भी तलब किया है। इसके लिए कोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार को लखनऊ के जिला जज की 29 सितंबर की रिपोर्ट को देखते हुए दोनों जिलों से ब्योरा लेने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी।

कोर्ट ने 10 दिसंबर को लखनऊ बेंच के वरिष्ठ निबंधक और यूपी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य, सचिव को संबंधित जिलों के पूरे विवरण के साथ पेश होने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति एआर मसूदी ने 3 दिसंबर को यह आदेश अभिषेक श्रीवास्तव और संजीव यादव की जमानत अर्जियों पर सुनवाई के बाद जमानत मंजूर करते हुए दिया था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह आश्चर्यजनक है कि जिला व सत्र न्यायाधीशों या मजिस्ट्रेटों द्वारा जमानत व रिमांड के मामलों में पूरी प्रक्रिया को गलत तरीके से समझा गया।

जबकि गत 25 मार्च का हाईकोर्ट का आदेश काफी स्पष्ट था। फिर भी नियम या पहले के सर्कुलर के तहत कार्यवाही नहीं की गई, जिसमें छुट्टियों के दौरान की प्रक्रिया वर्णित थी। कोर्ट ने रिमांड की अवधि बढ़ाए बगैर आरोपियों को जेल में रखने पर सख्त रुख अख्तियार किया।

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