अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 06 Apr 2021 12:33 AM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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कोरोना संक्रमण के एक बार फिर जोर पकड़ने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की जिला अदालतों, अधिकरणों और अपने अधीन काम करने वाले सभी न्यायालयों के लिए नई गाइड लाइन जारी की है। इसके तहत मुकदमों के निस्तारण के लिए ऑन लाइन मोड अपनाने पर जोर दिया गया है। ट्रायल के मुकदमों में साक्ष्य के अलावा  अन्य सभी न्यायिक व प्रशासनिक कार्य पूर्ववत ही किए जाएंगे। हाईकोर्ट ने विचाराधीन कैदियों का रिमांड और उनसे संबंधित अन्य न्यायिक कार्य जिस्टी मीट सॉफ्टवेयर के जरिए ऑन लाइन करने का निर्देश दिया है। साथ ही हर जिला अदालत में कम से कम एक या दो अदालतें जिस्ती मीट सॉफ्टवेयर से ही चलाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने अधिकतम काम ऑन लाइन मोड में करने की संभावना विकसित करने का निर्देश दिया है। 
महानिबंधक आशीष गर्ग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार ट्रायल के मुकदमों में यदि जिला जज यदि उचित समझें तो साक्ष्य लेने की अनुमति दे सकते हैं । ऐसी अनुमति प्रत्येक केस की प्रकृति को देखते हुए ही दी जा सकेगी। हाईकोर्ट ने पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह अदालतों में  एक समय में सीमित संख्या में ही लोगों को प्रवेश की अनुमति दें। इस दौरान शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा। हालांकि पीठासीन अधिकारी किसी पक्ष को सिवाए बीमारी की स्थिति के प्रवेश से रोकेंगे नहीं। मगर उनको यह अधिकार होगा कि वह व्यक्ति को प्रवेश से रोक सकें खासकर जहां सिर्फ वकीलों को बहस करनी है। 

हाईकोर्ट ने जिला जजों को संबंधित बार एसोसिएशन से वार्ता कर न्यायिक प्रक्रिया के संचालन की व्यवस्था निर्धारित करने का निर्देश दिया है। यदि संबंधित जिला जज या सीएमओ की सलाह है कि न्यायालय परिसर बंद किया जाना चाहिए तो जिला जज हाईकोर्ट को सूचित करते हुए ऐसा आदेश दे सकेंगे। हर जिला अदालत को वकीलों, वादकारियों की सहायता के लिए हेल्प लाइन नंबर जारी करने का निर्देश दिया है। वकील अदालत में पेश होने के लिए ड्रेस कोड से छूट प्रदान कर दी गई है। जजों को भी कोट और गाइन पहनने से छूट दी गई है। सभी जिला अदालतों को प्रतिदिन निस्तारित होने वाले मुकदमों की जानकारी हाईकोर्ट को ई सर्विस के जरिए भेजनी होगी।

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कोरोना संक्रमण के एक बार फिर जोर पकड़ने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की जिला अदालतों, अधिकरणों और अपने अधीन काम करने वाले सभी न्यायालयों के लिए नई गाइड लाइन जारी की है। इसके तहत मुकदमों के निस्तारण के लिए ऑन लाइन मोड अपनाने पर जोर दिया गया है। ट्रायल के मुकदमों में साक्ष्य के अलावा  अन्य सभी न्यायिक व प्रशासनिक कार्य पूर्ववत ही किए जाएंगे। हाईकोर्ट ने विचाराधीन कैदियों का रिमांड और उनसे संबंधित अन्य न्यायिक कार्य जिस्टी मीट सॉफ्टवेयर के जरिए ऑन लाइन करने का निर्देश दिया है। साथ ही हर जिला अदालत में कम से कम एक या दो अदालतें जिस्ती मीट सॉफ्टवेयर से ही चलाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने अधिकतम काम ऑन लाइन मोड में करने की संभावना विकसित करने का निर्देश दिया है। 

महानिबंधक आशीष गर्ग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार ट्रायल के मुकदमों में यदि जिला जज यदि उचित समझें तो साक्ष्य लेने की अनुमति दे सकते हैं । ऐसी अनुमति प्रत्येक केस की प्रकृति को देखते हुए ही दी जा सकेगी। हाईकोर्ट ने पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह अदालतों में  एक समय में सीमित संख्या में ही लोगों को प्रवेश की अनुमति दें। इस दौरान शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा। हालांकि पीठासीन अधिकारी किसी पक्ष को सिवाए बीमारी की स्थिति के प्रवेश से रोकेंगे नहीं। मगर उनको यह अधिकार होगा कि वह व्यक्ति को प्रवेश से रोक सकें खासकर जहां सिर्फ वकीलों को बहस करनी है। 

हाईकोर्ट ने जिला जजों को संबंधित बार एसोसिएशन से वार्ता कर न्यायिक प्रक्रिया के संचालन की व्यवस्था निर्धारित करने का निर्देश दिया है। यदि संबंधित जिला जज या सीएमओ की सलाह है कि न्यायालय परिसर बंद किया जाना चाहिए तो जिला जज हाईकोर्ट को सूचित करते हुए ऐसा आदेश दे सकेंगे। हर जिला अदालत को वकीलों, वादकारियों की सहायता के लिए हेल्प लाइन नंबर जारी करने का निर्देश दिया है। वकील अदालत में पेश होने के लिए ड्रेस कोड से छूट प्रदान कर दी गई है। जजों को भी कोट और गाइन पहनने से छूट दी गई है। सभी जिला अदालतों को प्रतिदिन निस्तारित होने वाले मुकदमों की जानकारी हाईकोर्ट को ई सर्विस के जरिए भेजनी होगी।



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