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41 मिनट पहले

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  • ग्रुप ने कैश-रिच हेल्थकेयर यूनिट को अलग करके कंपनी का रूप देने की योजना मौजूदा कारोबार की समीक्षा में बनाई
  • साइज बढ़ने और लो ग्रोथ मार्केट में लगातार रेवेन्यू हासिल होते रहने की संभावना, दूसरे चरण में PE फंड लाया जाएगा

डायवर्सिफाइड बिजनेस ग्रुप हिंदुजा ग्रुप की बिजनेस प्रोसेसिंग आउटसोर्सिंग (BPO) यूनिट हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशंस (HGS) अपने हेल्थकेयर बिजनेस को कंपनी में बदलने पर विचार कर रही है। ग्रुप ने अपने इस कैश रिच हेल्थकेयर यूनिट को अलग करके कंपनी का रूप देने की योजना मौजूदा कारोबार की समीक्षा में बनाई है। यह समीक्षा दो चरणों में कंपनी की बिजनेस यूनिट की वैल्यू अनलॉकिंग की जाने वाली कवायद का हिस्सा है। असल में कंपनी दूसरे क्वॉर्टर में रिकॉर्ड प्रॉफिट हासिल करने के बाद कारोबार में जारी तेजी को बकरार रखने पर फोकस कर रही है।

बिजनेस का साइज बढ़ने और कैश काउ बनने की संभावना

एक जानकार सूत्र ने बताया, “HGS ने हेल्थकेयर बिजनेस को अलग करने की योजना बनाई है क्योंकि इसके इसके साइज में बढ़ोतरी होने और कैश काउ बनने यानी लो ग्रोथ मार्केट में लंबे समय तक रेवेन्यू हासिल होते रहने की संभावना है। कंपनी का दूसरे चरण में इस नए बिजनेस में फ्रेश प्राइवेट इक्विटी फंड लाने का प्लान है।”

ग्रुप के फैसले की वजह अहम कारोबारों की वैल्यू अनलॉकिंग है

ग्रुप के यह फैसला लेने की अहम वजह एक अहम कारोबार की वैल्यू अनलॉकिंग करना है। उसको कंपनी में हिस्सेदारी बेचने से 700 से 800 करोड़ रुपये हासिल होने का अनुमान है। दूसरे सूत्र ने बताया कि डील कराने का काम इनवेस्टमेंट बैंक बार्कलेज को दिया गया है। उसने कहा, “सही भाव मिलने पर कंपनी की रीरेटिंग हो सकती है।”

सितंबर में बताया था सभी बिजनेस को अलग करने का मकसद

इसी साल सितंबर में कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को मैसेज भेजा था जिसमें उसने सभी बिजनेस को अलग करने के मकसद का जिक्र किया था। उसने कहा था, “बदलते मार्केट डायनेमिक्स और सभी डिविजन में वैल्यू अनलॉकिंग के मौके को देखते हुए HGS के बोर्ड ने कंपनी के मौजूदा पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का फैसला किया है। HGS का बोर्ड और मैनेजमेंट प्रॉफिटेबिलिटी और सभी बिजनेस डिविजन की वैल्यू बढ़ाने की जरूरत को अच्छे से समझता है। इसलिए HGS ने जनवरी 2020 में इंडिया का डोमेस्टिक बिजनेस बेच दिया था।

HGS की कारोबारी समीक्षा से बदलेगा उसका कारोबारी ढांचा

HGS की कारोबारी समीक्षा से उसके कारोबारी ढांचे में बदलाव आएगा और जरूरत पड़ने पर विलय और अधिग्रहण होगा या बिजनेस बेचा जाएगा। HGS को 2020 के सितंबर क्वॉर्टर में 81.3 करोड़ रुपये का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट हुआ था जो पिछले सितंबर क्वॉर्टर से 65.6 पर्सेंट ज्यादा था। पिछले एक महीने में कंपनी का शेयर 21 पर्सेंट उछला है।

कंपनी के हैं इंश्योरेंस, टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, कंज्यूमर, रिटेल वर्टिकल

कंपनी के टोटल रेवेन्यू में हेल्थकेयर बिजनेस का बड़ा हिस्सा है। कंपनी के दूसरे कारोबार में इंश्योरेंस, टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, कंज्यूमर और रिटेल वर्टिकल शामिल हैं। कंपनी के हेल्थकेयर बिजनेस का कंट्रिब्यूशन सितंबर क्वॉर्टर में सालाना आधार पर 10.8 पर्सेंट बढ़कर 739.5 करोड़ रुपये हो गया। उस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 9.4 पर्सेंट बढ़कर 1,332.6 करोड़ रुपये हो गया।

हमेशा स्ट्रॉन्ग परफॉर्मर रही है हेल्थकेयर कैटेगरी: CEO सरकार

HGS के CEO पार्था डे सरकार ने पिछले महीने कहा था, “हेल्थकेयर कैटेगरी हमेशा स्ट्रॉन्ग परफॉर्मर रही है, टेक्नोलॉजी क्लाइंट और ब्रिटेन के पब्लिक सेक्टर से भी बिजनेस ग्रोथ हासिल हो रही है।” उन्होंने कहा था कि अमेरिका में बायडेन की सरकार के लिए अफोर्डेबल हेल्थकेयर प्राइमरी फोकस होने से कंपनी को काफी फायदा होगा। HGS डिजिटल स्पेस में कंपनियों की खरीदारी की संभावनाएं तलाश रही है। 30 सितंबर 2020 को HGS के पास 235 कोर BPM (बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट) क्लाइंट और 699 HRO (ह्यूमन रिसोर्सेज आउटसोर्सिंग/पेरोल प्रोसेसिंग) क्लाइंट थे।

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