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2 घंटे पहले

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  • 2020-21 में कोविड के चलते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार के मौके सालाना आधार पर 32% घटे
  • यहां 2016-17 में 5.1 करोड़ वर्कर थे, 2020-21 में इनकी संख्या 46% घटकर 2.73 करोड़ रह गई

कोविड की दूसरी लहर के चलते देश में कुछ समय से रोजगार के मौके घटे हैं। यह बात जरूर है कि मई 2020 में धराशायी हुए जॉब मार्केट में कुछ समय पहले तक सुधार आ रहा था। लेकिन, सरकार की खूब तवज्जो पा रहे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार के मौकों में महामारी के चलते तेज गिरावट आई है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों से इस सेक्टर से वर्कर लगातार निकल रहे हैं और उनमें से ज्यादातर कृषि क्षेत्र में जा रहे हैं।

2020-21 में कोविड के चलते रोजगार के मौके सालाना आधार पर 32% घटे

पिछले वित्त वर्ष मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार के मौके पांच साल पहले के मुकाबले घटकर लगभग आधे रह गए थे। यह जानकारी सेंटर फॉर इकोनॉमिक डेटा एंड एनालिसिस (CEDA) और CMIE की स्टडी से मिली है।

उसके मुताबिक, खास तौर पर 2020-21 में कोविड के चलते इस सेक्टर में रोजगार के मौके सालाना आधार पर 32% घटे। रोजगार के मौके रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी तेजी से घटे, लेकिन इसमें पिछले पांच साल से गिरावट का रुझान बना हुआ था।

जीडीपी में 17% का योगदान करने वाले सेक्टर में 2016-17 में 5.1 करोड़ वर्कर थे

केमिकल इंडस्ट्री को छोड़कर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के सभी सब-सेक्टर में काफी समय से गिरावट आ रही है। जीडीपी में 17% का योगदान करने वाले इस सेक्टर में 2016-17 में 5.1 करोड़ वर्कर थे। तब से 2020-21 तक उनकी संख्या 46% की तेज गिरावट के साथ 2.73 करोड़ रह गई। इस सेक्टर में रोजगार जितनी तेजी से घटे हैं, उससे पता चलता है कि कोविड संकट कितना गंभीर है।

रियल एस्टेट में लगे वर्करों की संख्या एक चौथाई घटकर 5.37 करोड़ रह गई

इसी तरह, रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 2016-17 में लगभग 6.9 करोड़ वर्करों को रोजगार मिला हुआ था। लेकिन 2020-21 में उनकी संख्या लगभग एक चौथाई घटकर महज 5.37 करोड़ रह गई।

महामारी के चलते इस सेक्टर में रोजगार तेजी से घटे हैं, लेकिन इस पर अनबिके मकानों के स्टॉक, डिलीवरी में देरी और डेवलपर के दिवालिया होने के चलते पहले से ही दबाव बना हुआ था। 2004 से 2011 के बीच तेज इकोनॉमिक ग्रोथ के दौरान यहां रोजगार के मौके खूब बढ़े थे।

पिछले पांच वाल में कृषि क्षेत्र के वर्करों की संख्या 14.56 करोड़ से बढ़कर 15.18 करोड़ हुई

CEDA-CMIE ने 99% रोजगार पैदा करने वाले कृषि, खनन, मैन्युफैक्चरिंग, रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन, फाइनेंशियल सर्विसेज, नॉन फाइनेंशियल सर्विसेज और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस को अपनी स्टडी में शामिल किया था।

स्टडी के मुताबिक, कृषि क्षेत्र में काम करने वाले वर्कर की संख्या पिछले पांच वाल में 14.56 करोड़ से बढ़कर 15.18 करोड़ हो गई है, जिससे रोजगार में इस क्षेत्र का हिस्सा 36% से बढ़कर 40% हो गया।

कृषि क्षेत्र में रोजगार 2019-20 के दौरान 1.7% जबकि 2020-21 में 4.1% बढ़ा था

कृषि क्षेत्र में रोजगार पिछले दो साल से बढ़ रहा है और इसमें 2019-20 के दौरान 1.7% जबकि 2020-21 में 4.1% की बढ़ोतरी हुई। इसका मतलब मैन्युफक्चरिंग, नॉन फाइनेंशियल सर्विसेज, माइनिंग और रियल एस्टेट सेक्टर से निकलने वाले वर्कर रोजी-रोटी के लिए पारंपरिक क्षेत्र में जा रहे हैं।

सर्विस सेक्टर के सबसे बड़े हिस्से नॉन फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में वर्करों की संख्या पांच साल में 11.97 करोड़ से बढ़कर 12.77 करोड़ हो गई। लेकिन, 2020-21 में कोविड के चलते इसमें सालाना आधार पर तेज गिरावट आई थी।

16 मार्च को खत्म हफ्ते में नौ साल के सबसे ऊपरी लेवल पहुंच गई थी बेरोजगारी

CMIE के मुताबिक देश में बेरोजगारी का स्तर कुछ हफ्तों से ऊपरी लेवल है। यह 16 मार्च को खत्म हफ्ते में उछलकर नौ साल के सबसे ऊपरी लेवल, 14.45% पर पहुंच गई थी। शहरी इलाकों में बेरोजगारी पहले से ही ऊंचे लेवल पर है, ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी साप्ताहिक आधार पर डबल हो गई। इससे बेरोजगारी का स्तर तेज उछाल के साथ पिछले साल 7 जून के 17.51% के आंकड़े से थोड़ा नीचे रह गया।

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